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वाराणसी : शीघ्र स्तनपान व केवल स्तनपान की अहमियत समझाने को गांव-गांव लगी पोषण पाठशाला

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वाराणस। कुपोषण से मुक्ति के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा बच्चों के साथ-साथ गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को भी पोषण योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इसी क्रम में किसान पाठशाला की तर्ज पर गुरुवार को पूरे जिले के एनआईसी सहित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पाठशाला का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये किया गया। आयोजन का उद्देश्य कुपोषण दूर करने के लिए पोषण के प्रति जागरूक किया जाना तथा शीघ्र स्तनपान व छह माह तक केवल स्तनपान को लेकर समुदाय में जागरूकता बढ़ाना था।

पोषण पाठशाला में विशेषज्ञों के रूप में आईएचएटी-यूपीटीएसयू की नवजात और बाल स्वास्थ्य की निदेशक डॉ रेनू श्रीवास्तव, डॉ मोहम्मद सलमान खान, वरिष्ठ परामर्शदाता, बाल रोग विशेषज्ञ वीरांगना अवंतीबाई महिला अस्पताल लखनऊ, डॉ मनीष कुमार सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ ने विस्तार पूर्वक स्तनपान के संदर्भ में प्रमुख जानकारियां प्रदान की। जनपद से एनआईसी वाराणसी पर कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह, सीडीपीओ सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहा।

जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि पोषण पाठशाला के अंतर्गत सभी आंगनबाड़ी  केंद्रों पर कार्यकर्ताओं ने मौजूद रहते हुए स्मार्टफोन के जरिए प्रसारण दिखाया। इस पोषण पाठशाला से जिले भर में कुल 57,315 लोग जुड़े, जिसमें 3291 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व मिनी आंगनबाड़ी, आंगनबाड़ी केंद्र पर 54 हजार लाभार्थी एवं अभिभावक तथा एनआईसी में प्रतिभाग किए गए अधिकारी, कर्मचारी, लाभार्थी व अभिभावक सहित 23 लोग शामिल हुए।

डीपीओ ने बताया कि प्रचलित मिथकों के कारण केवल स्तनपान सुनिश्चित नहीं हो पाता है। मां एवं परिवार को लगता है कि स्तनपान शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है और वह शिशु को अन्य चीजें जैसे कि घुट्टी, शर्बत, शहद और पानी आदि पिला देती है जबकि स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है। पोषण पाठशाला में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से लोगों को विभाग की सेवाओं, पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषण शिक्षा आदि के बारे में जागरूक किया गया है। इसके साथ ही छह माह तक केवल स्तनपान का संदेश दिया गया।

उन्होंने छह माह तक केवल स्तनपान कराने पर जोर दिया। उन्होने कहा कि कुछ माताएं गर्मियों के दिनों में शिशुओं को पानी पिलाती है ऐसा भी नहीं करना चाहिए क्योंकि मां के दूध में पर्याप्त पानी की मात्रा होती है जिससे बच्चे के शरीर में पानी की कमी नहीं होती। डीपीओ ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गृह भ्रमण करते समय धात्री महिलाओं के साथ तो समन्वय स्थापित करें, साथ ही घर में रहने वाली अन्य महिलाओं को भी स्तनपान के संदर्भ सफल संवाद स्थापित कर जानकारी दें।

यूनीसेफ के मंडलीय पोषण सलाहकार अंजनीराय ने बताया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रथम पोषण पाठशाला कार्यक्रम का मुख्य थीम ‘शीघ्र स्तनपान – केवल स्तनपान’था। विषय विशेषज्ञों की ओर से शीघ्र स्तनपान केवल स्तनपान की आवश्यकता, महत्व, उपयोगिता आदि के संबंध में विस्तार से चर्चा की गयी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लाभार्थियों व अन्य द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर भी दिया गया ।

क्या कहता है सर्वे : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार उत्तर प्रदेश में शीघ्र स्तनपान की दर 23.9 प्रतिशत है। छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान की दर 59.7 प्रतिशत है। इस क्रम में जनपद वाराणसी में क्रमशः 36.4 प्रतिशत एवं 47.5 प्रतिशत है।

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