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वाराणसी : दुनिया में सब्जियों के लिए भी जाना जाएगा धान का कटोरा चंदौली, मोदी-योगी के प्रयासों से चंदौली को मिलने लगी है एक और पहचान

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वाराणसी। धान का कटोरा कहे जाने वाला चंदौली जिला जल्द ही दुनिया में सब्जियों के उत्पादन के लिए भी जाना जाएगा। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के पड़ोस में स्थित चंदौली में इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल के निर्माण को सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद इसका शिलान्यास हो चुका है। ये उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडो-इज़राइल दोस्ती की मिसाल है। चंदौली से सटे पूर्वांचल के जिलों के अलावा बिहार, झारखंड तथा मध्य प्रदेश के किसानों को भी इस सेंटर से लाभ मिलेगा। इस सेंटर के जरिए किसानों की आय को दोगुना करने के लिए उनको खेती की आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी। साथ ही उन्नत किस्म के बीज और पौधे भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

पीएम मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का किसानों कीगा है। पूर्वांचल  आय दोगुनी करके उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने का सपना धरातल पर उतरता हुआ दिखने लकी उपजाऊ मिट्टी और मेहतनकश किसान अब इज़राइल की तकनीक से खेती करना सीखेंगे। इसके लिए सरकार 07.0 हेक्टेयर में 666.47 लाख की लागत से इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल का शिलान्यास कर चुकी है।

चंदौली की जिला उद्यान अधिकारी अलका श्रीवास्तव ने बताया कि इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल में उच्च तकनीक से विकसित हाइटेक नर्सरी में पूरे वर्ष सब्जियों की उच्च गुणवत्ता युक्त पौधे तैयार करके कृषकों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इस तकनीक में पौधों की जड़ें काफी मजबूत होती हैं। पॉलीहाउस में सब्जियों का प्रदर्शन किया जाएगा। हाईटेक नर्सरी में तैयार पौधों की हैंडलिंग कर कृषकों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे खेत में पौधरोपण करने के बाद उनके मरने की समस्या समाप्त हो जाए। इसके अलावा पॉलीटनल तैयार किए जाएंगे, जिसमें हाई वैल्यू सब्जियों तथा शिमला मिर्च टमाटर, चेरी टमाटर आदि सब्जियों का प्रदर्शन किया जाएगा। ड्रिप सिंचाई सुविधा सहित मल्चिंग के साथ ओपन फील्ड में प्रदर्शन कराया जाएगा। विभिन्न सब्जियों के उन्नतशील प्रजातियों एवं ड्रिप सिंचाई पद्धति पर प्रोटेक्टड कल्टीवेशन एवं ओपन फील्ड (खुला खेत का क्षेत्र) कंडीशन में सजीव प्रक्षेत्र दिखाकर तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा एवं प्राप्त अच्छे परिणामों के आधार पर कृषकों को खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

क्षेत्रीय किसानों का सेंटर पर प्रशिक्षण द्वारा कौशल अभिवृद्धि की जाएगी जिससे किसान नवीनतम तकनीक अपनाकर सब्जियों की खेती द्वारा अधिक से अधिक आय प्राप्त कर सकें। दो तल के भवन में प्रशासनिक, कांफ्रेंस, लैबोरेटरी, सेल पॉइंट ऑटोमेशन रूम भी होंगे। इसके अलावा इंडो-इजरायल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल में प्रशासनिक एवं प्रशिक्षण भवन, हाईटेक नर्सरी, दो पाली हाउस, नेट हाउस, 10 पॉलीटनल, ड्रिप सिंचाई, 5 हेक्टेयर में प्रक्षेत्र प्रदर्शन ब्लॉक, कृषक प्रशिक्षण, ट्यूबवेल पंप हाउस, तालाब, सोलर पॉवर स्टेशन भी होगा।

मोदी-योगी सरकार में वाराणसी से हरी सब्जिया और फल का निर्यात बड़े पैमाने पर होने लगा है। बाबतपुर एयरपोर्ट से कार्गो उड़ान भरने लगे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण से लालबाहदुर शास्त्री बाबतपुर एयरपोर्ट की दूरी महज 80 किलोमीटर रह गई है। शुरू हो चुकी जलमार्ग सेवा से भी ट्रांसपोटेशन की रेगुलर व अच्छी सुविधा जल्द मिलने लगेगी। साथ ही सब्जियों व फलों के लिए राजातालाब के पास बने पेरिशेबल कोल्ड स्टोरेज में उत्पादों को कई दिनों तक स्टोर किया जा सकता है।

एपीडा के एजीएम डॉ सीबी सिंह ने बताया कि पिछले कुछ सालों में 5 से 6 हज़ार मीट्रिक टन सब्जियां व फल खाड़ी देशों, नेपाल और बांग्लादेश को निर्यात हो चुके हैं, जिसमें अकेले एयर कार्गो से 300 मीट्रिक टन पेरिशेबल उत्पाद एक्सपोर्ट हुआ है। उन्होंने बताया कि ये सेंटर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के उत्पाद देने में मदद करेगा, जिससे निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आय दोगुनी होगी।

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