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वाराणासी : न खेत था न मकान, रोहतास की प्रिया और बलिया के अंगद के लिए आयुष्मान योजना बना वरदान

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वाराणसी। आयुष्मान योजना (Ayushman Bharat Yojana) नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार की योजना ने गरीबों और असहाय इलाज करके नए जीवन की तरफ लाया है। 2018 से शुरू हुई इस योजना के तहत करीब 5.72 लाख जिलें में इसके लाभार्थी है। इसी क्रम में बीएचयू (BHU) स्थित ट्रामा सेंटर ने आयुष्मान भारत योजना से 649 को नई जिंदगी दी है। जिसमें ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया झा बलिया के अंगद यादव और रोहतास की प्रिया की इलाज करने की क्षमता नही थी। इस योजना के तहत इन दोनों लोग का बीएचयू ट्रामा सेंटर (BHU Trauma Centre) में इलाज चल रहा है।

बिहार की प्रिया को आयुष्मान योजना ने दी नई जिंदगी

इसी कड़ी में रोहतास (बिहार) के मुन्ना कुमार गुप्ता की 11 वर्षीय बेटी “प्रिया को स्कूल में लंच के समय किसी छात्र ने पीछे से धक्का दे दिया था। जिससे प्रिया का 6 महीने के बाद शरीर का एक हिस्सा सुन्न होने लगा। वही जब जांच में पता चला कि प्रिया के गर्दन की नस खिसक गई थी। जिसको लेकर प्रिया के परिजन बिहार के कई अस्पतालों में चक्कर लगाया मगर उपचार से कोई लाभ न हुआ। वही जब परिजनों ने प्रिया को बीएचयू के ट्रामा सेंटर लाया गया जहां 11 मार्च को आपरेशन हुआ। प्रिया उसी समय से आइसीयू (ICU) में है। अब तक ढाई लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। इसका भुगतान आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया। वही बात करे निजी अस्पताल में आपरेशन होता तो यह खर्च पांच लाख से अधिक का आता।

परिवार के पास इलाज के लिए नही था पैसा, आयुष्मान बना वरदान

वही दूसरा मामला बलिया के कुंडेल शाह गांव निवासी अंगद यादव के सिर पर गहरी चोट लगी थी। जहां परिजन आजमगढ़ के निजी अस्पताल में इलाज के लिए ले गए तो 20 लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन परिवार के पास तो 20 हजार रुपये तक नही थे। जब परिजनों को जानकारी हुई तो बीएचयू में भर्ती कराया गया जहां दो माह से आइसीयू (ICU) में उपचार चल रहा है। आयुष्मान भारत योजना से इसका भुगतान हो रहा है। वही दोनों ही मरीजो के परिजन बता रहे है कि अगर आयुष्मान कार्ड नहीं रहता तो उनके मरीज की जान नहीं बच पाती, क्योंकि उनके पास उपचार के लिए पैसा या बेचने के लिए खेत भी नहीं है।

आयुष्मान योजना से एक साल में 649 मरीजों को मिली नया जीवन

आयुष्मान भारत योजना के तहत बीएचयू ट्रामा सेंटर में एक साल में 2.39 करोड़ रुपये से 649 मरीजों का इलाज कर नई जिंदगी मिली है। जिनमें किसी का कूल्हा प्रत्यारोपण, घुटना प्रत्यारोपण, मस्तिष्क विस्फार, रीढ़ की हड्डी समेत समस्त हड्डी रोगों की सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, ट्रामा सर्जरी की गई। इसके लिए उन्हें खेत, मकान, दुकान और जेवर तक बेचने पड़ते, लेकिन जिनके पास इसकी भी गुंजाइश न थी वे सिर्फ भगवान भरोसे थे। उनके लिए योजना संजीवनी बन गई।

वही बीएचयू ट्रामा सेंटर के इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह बताया कि ट्रामा सेंटर में मई 2021 से मई 2022 के बीच 649 मरीजों को नया जीवन मिला, जो चलने, उठने-बैठने, बोलने की उम्मीद खो चुके थे।

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