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वाराणसी : माँ का दूध अमृत के समान, छह माह तक सिर्फ स्तनपान, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समुदाय को करेंगी जागरूक

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वाराणसी। पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। पोषण एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी संकेतकों में सुधार लाने के लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर विविध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में मंगलवार (10 मई) से ‘पानी नहीं, केवल स्तनपान अभियान’ शुरू किया जाएगा, जिससे छह माह तक केवल स्तनपान की दर में वृद्धि होने के अपेक्षित परिणाम प्राप्त होने के साथ ही शिशु मृत्यु दर में भी सुधार लाया जा सकेगा। इसके लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ सारिका मोहन ने वाराणसी सहित प्रदेश के सभी जिलाधिकारी को पत्र जारी कर दिशा-निर्देश दिये गए।

आईसीडीएस विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर अभियान से संबन्धित दिशा-निर्देश समस्त विकास खंड के बाल विकास परियोजना अधिकारियों को जारी कर दिया गए हैं। उन्होने कहा कि गर्मियों में शिशुओं में केवल स्तनपान सम्बन्धी व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए ‘पानी नहीं, केवल स्तनपान अभियान’ 30 जून तक समस्त कन्वर्जेंस विभागों, जन प्रतिनिधियों तथा डेव्लपमेंट पार्टनर्स के सहयोग से संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा समुदाय में छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान सुनिश्चित करना है। माँ का दूध शिशु के लिए अमृत के समान होता है तथा शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आवश्यक है कि जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु का स्तनपान प्रारम्भ करा दिया जाये। छह माह की आयु तक शिशु को “केवल स्तनपान” ही कराया जाये।

डीपीओ ने कहा कि शिशु की छह माह की आयु तक “केवल स्तनपान” उसके जीवन की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, लेकिन जागरूकता की कमी से समाज में प्रचलित विभिन्न मान्यताओं व मिथकों के कारण छह माह तक “केवल स्तनपान सुनिश्चित नहीं हो पाता है। परिवार के सदस्यों द्वारा शिशु को घुट्टी, शहद, चीनी का घोल, पानी आदि का सेवन करा दिया जाता है, जिसके कारण शिशुओं में कई प्रकार के संक्रमण हो जाते हैं, जोकि शिशु के स्वस्थ जीवन के लिए घातक सिद्ध होता है। शिशु के प्यासा रहने की आशंका मे उसे पानी देने का प्रचलन गर्मियों में बढ़ जाता है। माँ के दूध में अन्य पौष्टिक तत्वों के साथ-साथ पानी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है और शिशु की पानी की आवश्यकता केवल स्तनपान से पूरी हो जाती है। अतः शिशु को छः माह तक, ऊपर से पानी देने की बिलकुल आवश्यकता नहीं होती है। ऊपर से पानी देने से शिशुओं में संक्रमण होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

क्या कहते हैं आंकड़े : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफ़एचएस-5) के अनुसार उत्तर प्रदेश में छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान” की दर 59.7 प्रतिशत है, जबकि भारत मे यह 63.7 प्रतिशत है। एनएफ़एचएस- 5 के अनुसार, उत्तर प्रदेश के जनपद मिर्ज़ापुर, अमेठी, बस्ती, लखनऊ में “केवल स्तनपान की दर जहां 70 प्रतिशत से अधिक है। वहीं वाराणसी सहित आगरा, बांदा, रामपुर व अन्य जनपदों में “केवल स्तनपान” की दर 50 प्रतिशत से भी कम है। इसलिए जागरूकता के उद्देश्य से यह अभियान व्यापक रूप से चलाया जाएगा।

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