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वाराणसी : स्नेह, धैर्य व सेवाभाव  का दूसरा नाम है नर्स : डॉ. प्रसन्न

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वाराणसी। फ्लोरेंस नाइटेंगल के  जन्मदिन 12 मई को ‘अन्तर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर गुरूवार को जिले के विभिन्न अस्पतालों में कार्यक्रमों का आयोजन कर फ्लोरेंस नाइटेंगल को याद करने के साथ ही उनके पदचिन्हों पर चल रही नर्सो की   सेवाओं की सराहना की गयी।

शिवप्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय में आयोजित समारोह में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डा. प्रसन्न कुमार ने क्रीमिया युद्ध में फ्लेरेंस नाइटेंगल की भूमिका को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सेवा की जो मिसाल पेश की उसे आज भी याद किया जाता है। युद्ध में घायलों की सेवा के लिए वह रात के अंधेरे में लालटेन लेकर निकलती थीं और उनका उपचार करने के साथ-साथ महिलाओं को नर्स का प्रशिक्षण भी देती रहीं।

उनके इस महान कार्य के चलते ही उन्हें ‘लेडी विद द लैम्प’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि फ्लोरेंस नाइटेंगल तो अब इस दुनिया  में नहीं हैं  लेकिन उन्होंने मानवीय सेवा का जो बीज बोया था उसकी फसल आज विश्व में लहलहा रही है। उनके पदचिन्हों पर चलते हुए आज नर्स जिस तरह से मरीजों की सेवा करती हैं उसकी वजह से उन्हें स्नेह, धैर्य व सेवा का एक रूप माना जाता है।

उन्होंने कहा कोविड काल में नर्सों ने विपरीत परिस्थतियों में जिस तरह का योगदान किया उसे लम्बे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस सेवा के बल पर  ही हमारी नर्से स्वास्थ्य महकमे की मजबूत कड़ी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं । कार्यक्रम के प्रारम्भ में दीप प्रज्वलन व केक काटने के साथ ही नर्सो ने प्रेम, करुणा के साथ मरीजों की सेवा करने की शपथ ली। कार्यक्रम में मण्डलीय चिकित्सालय की मैटर्न फूलमती देवी, सिस्टर इंचार्ज राजमती देवी ने भी विचार व्यक्त किये।

राजकीय महिला चिकित्सालय में भी हुआ आयोजन

इस मौके पर राजकीय महिला जिला चिकित्सालय, कबीरचौरा में भी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अस्पताल के सभागार में आयोजित समारोह में
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) डा.ए.के. श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह आज ऐसे लोगों के बीच मौजूद है जिन्हें सेवा की देवी के रूप में जाना जाता है। समारोह में मैटर्न कंचनलता जायसवाल ने स्टाफ नर्स से सिस्टर बनी दीपिका दयाल, पुष्पा देवी, सुधा मौर्य, लालती भारती को बैज लगाकर सम्मानित किया गया ।

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