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वाराणसी : प्रसव पूर्व जांच को लेकर जिले में बढ़ी जागरूकता, CMO बोले – अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना प्राथमिकता

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वाराणसी। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने को लेकर  कई योजनाएँ व कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं । इससे  जिले की महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आई है। इसका सुखद परिणाम हाल ही में जारी  नेशनल  फेमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) – 5 (वर्ष 2020-21) की रिपोर्ट में देखने को मिला  है।

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (आरसीएच) डॉ एके मौर्या ने बताया कि जच्चा-बच्चा के बेहतर स्वास्थ्य व सुरक्षित प्रसव के लिए प्रसव पूर्व जांच व देखभाल (एएनसी) बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच आवश्यक रूप से करानी चाहिए। एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में गर्भावस्था की पहली तिमाही में 74.3 फीसदी गर्भवती ने प्रसव पूर्व जांच कराई, जबकि वर्ष 2015-16 में जारी एनएफएचएस-4 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा 52.2 प्रतिशत था। इसी तरह एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार 51.4 फीसदी गर्भवती ने कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच कराई, जबकि वर्ष 2015-16 में यह आंकड़ा 33.3 प्रतिशत था । इसके साथ ही 95 फीसद  महिलाएं प्रसव के दौरान नवजात टिटनेस से सुरक्षित रहीं जबकि एनएफ़एचएस-4 में यह आंकड़ा 92.9 प्रतिशत था।

आयरन की कमी को दूर किया आईएफ़ए गोलियों ने

डॉ मौर्या ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी पूरा करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं द्वारा आयरन फॉलिक एसिड (आईएफ़ए) की गोलियां दी जाती हैं। इसी को देखते हुये एनएफएचएस-5 के अनुसार 30.1 फीसदी गर्भवती ने कम से कम एक 100 दिन एवं 10.7 फीसदी गर्भवती ने कम से कम 180 दिनों तक आयरन फोलिक एसिड गोली का सेवन किया, जबकि वर्ष 2015-16 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा क्रमश: 20.2 और 6.4 प्रतिशत था।

मातृ एवं शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड बेहद जरूरी

जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की देखभाल व निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मातृ एवं शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड बनाया जाता है। इसी क्रम में वर्ष 2020-21 के सर्वे के अनुसार 99 फीसदी गर्भवती को एमसीपी कार्ड मिला, जबकि वर्ष 2015-16 के सर्वे में यह आंकड़ा 81.9 प्रतिशत था। एनएफ़एचएस-5 के सर्वे में 85.1 फीसदी महिलाओं को प्रसव के बाद दो दिन तक किसी एक डॉक्टर, नर्स, महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, एएनएम या आशा कार्यकर्ता द्वारा स्वास्थ्य देखभाल मिली है जबकि वर्ष 2015-16 के सर्वे में यह आंकड़ा 69.4 प्रतिशत था। एनएफ़एचएस-5 में ही 82 फीसदी बच्चों को दो दिन तक चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्वास्थ्य देखभाल मिली है।

प्रसव पूर्व जांच की सुविधा सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मौजूद

डॉ मौर्य ने बताया कि प्रसव पूर्व जांच व देखभाल के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान दिवस (हर माह की नौ तारीख), ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएनडी) एवं समस्त सरकारी चिकित्सालयों पर निःशुल्क व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही जांच में एचआरपी के रूप में चिन्हित हुईं महिलाओं पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है और काउन्सलिन्ग कर सुरक्षित प्रसव कराया जाता है।  

महिलाएं स्वास्थ्य को लेकर हुईं सजग

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी* का कहना है कि आंकड़ों के अनुसार बीते चार से पाँच सालों में जिले में महिलाएँ अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी सजग हुई हैं। इसके साथ ही महिलाएं अपने और अपने गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील हो रही हैं। स्वास्थ्य की योजनाओं के बारे में समुदाय में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। यह खुशी की बात है कि आमजन तक सरकार द्वारा जा रही स्वास्थ्य सेवाओं आसानी से पहुंच रही हैं। इस बात का पुख्ता सबूत भारत सरकार की एनएफ़एचएस-5 की रिपोर्ट है। उन्होने कहा कि स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है कि समुदाय के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके। उन्होने भविष्य में भी इसी तरह के सकारात्मक परिणाम की कामना की है।

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