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वाराणसी : बेहतर स्वास्थ्य के लिए एसएनसीयू व केएमसी की भूमिका अहम, शिशु को बीमारियों से है बचाना तो प्रसव पूर्व जांच जरूर कराना

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वाराणसी। कई बार गर्भावस्था में किसी तरह की समस्या आने के कारण शिशु का जन्म समय से पहले ही हो जाता है। समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर) लेने वाले शिशुओं को कई तरह की समस्याएं हो सकती है। इसलिए प्रीमैच्योर शिशुओं का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है। नहीं तो शिशु को बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। यह कहना है जिला महिला चिकित्सालय की वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ मृदुला मल्लिक का।

डॉ मल्लिक ने कहा कि गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले जन्में शिशु प्रीमैच्योर की श्रेणी में आते हैं। महिलाओं की कम उम्र, डायबिटीज़ (मधुमेह), ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) एवं गर्भावस्था में किसी तरह की समस्या के कारण शिशु का जन्म समय से पहले हो जाता है। इससे बचाव के लिए गर्भावस्था के दौरान सभी प्रसव पूर्व जांच (मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि) व देखभाल करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही आयरन की गोली का भी सेवन करना जरूरी है। प्रसव पूर्व जांच व देखभाल के दौरान महिलाएं उचित समय में चिकित्सक की सलाह से एस्ट्रोइड लगवाना चाहिए, जिससे प्रीमैच्योर शिशु को गंभीर समस्या न हो। उन्होने कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को दिमागी और शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे शिशुओं को हाईपोथर्मिया, पीलिया, निमोनिया, दिमागी बुखार, सीखने में कठिनाई और सांस संबंधी बीमारियां होने का डर रहता है।

डॉ० मृदुला मलिक

एसएनसीयू की भूमिका अहम : डॉ मल्लिक ने बताया कि समय से पहले जन्मे शिशुओं को अधिक देखभाल की जरूरत होती है। जिन बच्चों का वजन 1800 ग्राम से कम है, 34 सप्ताह के शिशु हैं, हाइपोथर्मिया, जन्म के समय रोया न हो, सांस संबंधी समस्या हो तो चिकित्सक ऐसे शिशुओं को कुछ दिन के लिए एसएनसीयू (सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट) रखने की सलाह देते हैं। इसमें चिकित्सक और नर्स की टीम 24 घंटे शिशु की देख-रेख करते हैं। एसएनसीयू में शिशु को भर्ती कर उपचार किया जाता है। अगर शिशु की स्थिति सामान्य नहीं है तो अधिक दिनों तक एसएनसीयू में रखा जा सकता है। यह सुविधाएं पूरी तरह से निःशुल्क हैं।

केएमसी विधि जरूर अपनाएं : डॉ मल्लिक ने कहा कि समय से पहले जन्मे शिशुओं के शरीर के तापमान को सामान्य रखने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) विधि को जरूर अपनाएं। त्वचा से त्वचा का संपर्क होने से शिशु को काफी आराम मिलता है। माँ के साथ घर का कोई भी सदस्य इस विधि को कर सकता है। एक दिन में पाँच से छह बार और हर बार कम से कम एक घंटे के लिए केएमसी विधि की जा सकती है। 

टीकाकरण भी बेहद जरूरी : डॉ मल्लिक ने कहा कि चिकित्सक की सलाह के अनुसार शिशु को जन्म के समय लगने वाले सभी टीके अवश्य लगवाएँ। टीकाकरण से शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण का खतरा भी कम रहता है।  

लक्षण

• सुस्त होना ।
• सांस संबंधी समस्याएं ।
*स्वास्थ्य समस्याएं -*
• हाईपोथर्मिया (ठंडा बुखार)
• एनीमिया (खून की कमी)
• पीलिया (जौंडिस)
• दिमागी बुखार
• सांस लेने में कठिनाई
• गर्भावस्था में संक्रमण होने के कारण शिशु में संक्रमण का जोखिम ।
• हृदय से जुड़ी समस्या ।
• अंधेपन का खतरा ।  

ऐसा रखें शिशु का ख्याल

• स्तनपान जारी रखना चाहिए।
• तापमान सामान्य रखने के लिए केएमसी विधि जरूर अपनाएं।
• समय से पहले जन्मे शिशु की नींद का ध्यान रखना चाहिए।
• शिशु के शरीर को हमेशा स्वच्छ रखना चाहिए।
• शिशु की नाभि में कुछ नहीं लगाना चाहिये।
• शिशु को सामान्य तापमान वाले कमरे में लेटाएं। कमरा ज्यादा हवादार न हो, धुंआधार न हो ताकि शिशु को आराम मिल सके।
• चिकित्सक की छोटी से छोटी बातों का विशेष ध्यान रखें।

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