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वाराणसी : क्लाइमेट एजेंडा की पहल, कृत्रिम फेफड़ा बताएगा प्रदूषण का प्रभाव काशीवासियों के फेफड़ो पर पड़ रहा कितना असर

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वाराणसी। 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान के अंतर्गत क्लाइमेट एजेंडा द्वारा वाराणसी के अस्सी घाट पर आज उच्च क्षमता वाले फिल्टर युक्त एक जोड़ा कृत्रिम फेफड़ा स्थापित किया गया। मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के गंभीर प्रभाव को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने वाले इन कृत्रिम फेफड़ों के साथ 10 दिवसीय गतिविधियों का उदघाटन क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर, शहर के जाने माने चिकित्सक डॉ आर एन वाजपेयी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के निदेशक डॉ ए एस रघुबंशी जी और योगगुरु पंडित विजय प्रकाश मिश्रा जी के प्रारम्भिक वक्तव्य के साथ हुआ।

उदघाटन वक्तव्य में डॉ० ए० एस० रघुबंशी ने कहा इन कृत्रिम फेफड़ों पर वायु प्रदूषण के प्रभाव को प्रदर्शित करते हुए समाज में जागरूकता लाने के प्रयास प्रशंसनीय है. हर वर्ष वाराणसी की हवा काफी प्रदूषित हो जाती है, जिससे स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण अब हमारे स्वास्थ्य व खुशहाली के खिलाफ एक बड़ा खतरा बन चुका है. सौर ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा आधारित मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली, एवं स्वच्छता से ही हमारे शहर की हवा स्वच्छ की जा सकती है। डॉ० रघुबंशी ने आशा जताई कि इन कृत्रिम फेफड़ों की सहायता से स्वच्छ हवा के लिए वाराणसी का संघर्ष जरूर अच्छे परिणाम देगा।

इस पहल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए एकता शेखर ने बताया की आज स्थापित किये गए कृत्रिम फेफड़ो को बनाने में अति उच्च क्षमता वाले फिल्टर का उपयोग किया गया है, जो प्रदूषण के प्रभाव में आ कर कुछ दिनों में स्वतः काले हो जायेंगे। ऐसा कर के हम यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वायु प्रदूषण हमारे फेफड़ों और स्वास्थ्य पर कितना बुरा प्रभाव डालता है। हाल ही में जारी वर्ल्ड एयर क्वालिटी  रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 50 सबसे प्रदूषित शहरो में 14 शहर उत्तर प्रदेश के हैं।

उन्होंने कहा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण की रिपोर्टो में लगातार यह देखा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के अधिकतर शहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लगातार टॉप पर आ रहे हैं। ऐसे में यह गतिविधि आम लोगों को अपने बीच मौजूद लेकिन अदृश्य खतरे को देखने समझने में एवं इसका समाधान अपनाने में सहायता करेगा। जबकि विद्युत् वाहन, सौर ऊर्जा आदि के रूप में समाधान हमारे बीच में तो हैं, लेकिन इन्हें आम जनता एवं सरकार प्रदूषण के समाधान के रूप में नहीं देखती। फेफड़ों को स्थापित कर की जा रही ये गतिविधि निश्चित रूप से सकारात्मक परिवर्तन लायेगी।

इस अवसर पर शहर के जाने माने चिकित्सक और प्रदूषण के कारण होने वाले श्वसन सम्बन्धी समस्याओं के विशेषज्ञ डॉ आर एन बाजपेई ने कहा उच्च गुणवत्ता वाले फिल्टर और पंखों के उपयोग से बनाये गए फेफड़े वास्तविक फेफड़ों की तरह ही कार्य करते हैं। वायु प्रदूषण के असर से अगले दस दिनों में इनका काला हो जाना आम लोगों को प्रदूषण के असर को बारीकी से देखने समझने में सहयोग करेगा। धुम्रपान ना करने वालों के फेफड़े भी स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अब काले दिखने लगे हैं, इसका अर्थ यह हुआ कि अब वायु प्रदूषण के खतरनाक प्रभाव को नकारने के बजाये स्वच्छ हवा को स्वच्छ भारत मिशन का अहम् हिस्सा बनाए जाने का वक्त आ गया है।

इसी क्रम में आगे योग गुरु पंडित विजय प्रकाश मिश्रा ने कहा कि इस कृत्रिम फेफड़ा को बनारस के सबसे प्रसिद्ध घाट पर स्थापित किये जाने के कारण बनारस के आम नागरिक के अलावा देश विदेश से आने वाले हज़ारो सैलानियों को भी वायु प्रदूषण एवं उसके प्रभाव के सन्दर्भ में जागरूक करेगा। और प्रदूषण के प्रत्यक्ष प्रभाव को देख कर आम जनता अवश्य ही अपने व्यवहार को पर्यावरण अनुकूल बनाने का प्रयास करेगी।

दस दिवसीय इस कार्यक्रम के उदघाटन सत्र में शहर के जाने माने नागरिकों के अलावे विभिन्न शोधार्थी, छात्र, नौजवान व सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। अगले दस दिनों तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

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