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वाराणसी : मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने पूरी की बेटियों की मनोकामना, अब तक इतनों को मिला लाभ

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वाराणसी। “बेटियाँ हैं घर की शान, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य का रखें पूरा ध्यान” टैग लाइन से शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना बेटियों की मनोकामना को पूर्ण करने में बहुत ही मददगार साबित हुई है। इसके तहत जन्म से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने तक छह अलग-अलग श्रेणियों में कुल 15,000 रुपये प्रदान किए जाते हैं। यह योजना बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की सोच को भी धरातल पर उतारने में सफल रही है।

बालिकाओं को समाज में सम्मानजनक दर्जा दिलाने के साथ ही बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखने के लिए ही हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में बालिकाओं की बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की शुरुआत की गई है जो बालिकाओं के सपनों को उड़ान देने में बहुत ही मददगार साबित हुई है।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का मुख्य उदेश्य बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा की स्थिति को सुदृढ़ बनाना और कन्या भ्रूण हत्या को खत्म करना है। इसके अलावा योजना के माध्यम से प्रदेश में समान लिंगानुपात को स्थापित करना, बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करना और नवजात कन्या के परिवार को आर्थिक मदद पहुंचाना भी है। योजना का लाभ पाने के लिए उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए और परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। परिवार में दो ही बच्चे होने चाहिए और योजना का लाभ भी अधिकतम दो ही बच्चियों को मिल सकता है। बालिका यदि वयस्क हो तो खुद या माता/पिता व अभिभावक आवेदक हो सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन कामन सर्विस सेंटर/ साइबर कैफ़े या स्मार्टफोन/कंप्यूटर के माध्यम से https://mksy.up.gov.inपर लाग इन कर किया जा सकता है । इसके अलावा जिला प्रोबेशन अधिकारी के कार्यालय से संपर्क कर आवेदन किया जा सकता है ।

लाभार्थी की कहानी, उन्हीं की जुबानी

सेवापुरी की रहने वाली सुनीता मौर्य का कहना है कि उनके पहले बच्चे सुकन्या के जन्म का दिन उनके जीवन का सबसे खुशी का दिन था। वह और उनके पति राहुल सुकन्या की बेहतर देखभाल को लेकर थोड़े चिंतित जरूर थे। इसी दौरान आशा कार्यकर्ता ने उन्हें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के बारे में जानकारी दी, जिसके लिए कामन सर्विस सेंटर जाकर उन्होंने आवेदन कर दिया। एक महीने के भीतर सुनीता के पति के खाते में 2,000 रुपये आ गए। इस पैसे से सुनीता ने बेटी के लिए पोषक खाद्य पदार्थ और कपड़े आदि खरीदे और भविष्य में भी योजना के तहत और भी लाभ मिलने की पूरी उम्मीद सुनीता को है। सुनीता कहती हैं-“योजना से मिले पैसे से मैं अपनी बेटी का अच्छी तरह से पालन-पोषण कर पा रही हूँ।” उनके पति राहुल कहते हैं- “बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की यह योजना बहुत कारगर है।”

ऐसा ही कुछ कहना यहीं की निशा देवी और उनके पति रमेश का भी है। उन्हें भी बेटी दिव्यांशी के जन्म पर 2,000 रुपये मिल चुके हैं। इससे कुछ अलग हटकर एक कहानी 15वर्षीया दिव्या पाल की है, जो सेवापुरी में अपनी माँ के साथ रहती हैं । पिता के निधन के बाद इस गरीब परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माँ उमा मजदूरी कर बेटी की पढ़ाई को जारी रखा क्योंकि बेटी का सपना जो एक शिक्षिका बनने का है । स्कूल में दिव्या को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के बारे में पता चला। उसने इसके लिए आवेदन कर दिया और एक महीने के भीतर 3,000 रुपये बैंक खाते में आ गए। गवर्नमेंट हाई स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली दिव्या कहती हैं कि योजना से मिले पैसे से किताबें, स्टेशनरी खरीदने और जेब खर्च को पूरा करने में बहुत मदद मिली। दिव्या की माँ उमा का कहना है- “मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से बालिकाओं को अतिआवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए सरकार की इस योजना की आभारी हूँ।”

योजना की श्रेणियाँ व मिलने वाली धनराशि

पहली श्रेणी – बालिका के जन्म होने पर-              2,000 रुपये

दूसरी श्रेणी- एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण पर-   1,000 रुपये

तीसरी श्रेणी- कक्षा-एक में प्रवेश पर-                  2,000 रुपये

चौथी श्रेणी- कक्षा-6 में प्रवेश पर-                       2,000 रुपये

पाँचवीं श्रेणी- कक्षा-9 में प्रवेश पर-                     3,000 रुपये

छठी श्रेणी- 10वीं/12वीं उत्तीर्ण कर स्नातक या दो वर्षीय या अधिक

अवधि के डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश पर-                 5,000 रुपये

कितनी बालिकाओं को अब तक मिला लाभ

जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रवीण त्रिपाठी का कहना है कि इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत प्रदेश में अप्रैल 2019 में हुई थी, अब तक जिले में लगभग 33,460 बालिकाओं को इस योजना के तहत लाभान्वित किया गया है। इनमें सेवापुरी ब्लॉक की करीब 4,175 बलिकाएं शामिल हैं। प्रवीण का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं के साथ ही स्कूलों के माध्यम इस योजना का व्यापक पर-प्रसार किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा बालिकाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर अपने सपनों को साकार कर सकें।

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