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वाराणसी : सुरक्षित गर्भपात के पश्चात देखभाल भी बेहद जरूरी, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस पर आयोजित हुई गोष्ठी

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वाराणसी। सुरक्षित गर्भपात और इसके पश्चात उसकी देखभाल करना बेहद जरूरी है। समुदाय में सुरक्षित गर्भ का चिकित्सीय समापन (एमटीपी) के बारे में जागरूकता का प्रचार करना और उससे जुड़ी सेवाएं प्रदान कराना विभाग का प्रमुख उद्देश्य है। जनपद के सभी ब्लॉक स्तरीय पीएचसी, सीएचसी व एफ़आरयू पर सुरक्षित गर्भपात की सेवाएं 24 घंटे सातों दिन निःशुल्क मौजूद हैं।

यह बातें बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भपात दिवस पर आयोजित गोष्ठी के दौरान कहीं गईं। स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में फोग्सी व आईपास की एमटीपी समिति के सहयोग से आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता सीएमओ डॉ संदीप चौधरी ने की। उन्होने कहा कि जागरूकता के अभाव से लगभग दो तिहाई गर्भपात अधिकृत स्वास्थ्य केन्द्रों से बाहर अनाधिकृत एवं अकुशल लोगों द्वारा संपन्न कराए जाते हैं। सुरक्षित एमटीपी के लिए गोपनीय परामर्श को सुगम बनाने और इसके बारे में परामर्श देने के लिए एएनएम, आशा कार्यकर्ता व अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है। आशा गोपनीयता बरतते हुए एएनएम को सूचित करती हैं, इसके पश्चात यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

स्त्री रोग विशेषज्ञ व अधीक्षक डॉ सारिका राय ने कहा कि गर्भपात चाहे अपने आप हुआ हो अथवा किया गया हो, यह चिंता का विषय है विशेषकर इसलिए क्योंकि इसके साथ महिलाओं में सेप्सिस, और अन्य जटिलताएं जुड़ी होती हैं। मातृ मृत्यु में से आठ प्रतिशत मृत्यु गंभीर गर्भपातों का कारण होती हैं। सुरक्षित गर्भपात से इसकी रोकथाम की जा सकती है। डॉ रुचि सिन्हा ने गर्भपात के पश्चात परिवार नियोजन साधनों एवम आवश्यक दवाओं व देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

एमटीपी अधिनियम पर भी की चर्चा

अब 24 सप्ताह के अंदर गर्भपात कानूनन वैध – आईपास से डॉ प्रकाश ने एमटीपी अधिनियम 1971, अधिनियम 2003 और 2021 के संशोधन के बारे में विस्तार से चर्चा की। बताया कि गर्भ का चिकित्सीय समापन अधिनियम को वर्ष 1971 में पारित किया गया था तथा यह 1972 से लागू हुआ। इस कानून का उद्देश्य असुरक्षित गर्भपातों के कारण होने वाली मातृ-मृत्यु और अस्वस्थता को कम करना था। इसके बाद साल 2003 और 2021 में कई नए संशोधन किए गए।

1971 के अधिनियम के अंतर्गत एमटीपी सिर्फ वैवाहिक महिलाओं के लिए था जबकि 2021 में यह वैवाहिक व अवैवाहिक दोनों के लिए मान्य कर दिया गया है। 1971 से 20 सप्ताह के अंदर गर्भपात को निर्धारित अनुकूल परिस्थियों सहित कानूनन वैध माना गया था तो वहीं 2021 में 20 से 24 सप्ताह के अंदर गर्भपात को निर्धारित अनुकूल परिस्थितियों के साथ कानूनन वैध बताया गया है।

इस मौके पर एसीएमओ डॉ० राजेश प्रसाद, डीपीएम संतोष सिंह, आईपास के प्रोग्राम स्पेशलिस्ट संजय त्रिवेदी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

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