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वाराणसी : “ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष तक स्तनपान भी जरूरी”, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मनाया गया अन्नप्राशन दिवस

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वाराणसी। छह माह की आयु पूरी करने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ ऊपरी अर्द्ध ठोस आहार देना भी जरूरी हो जाता है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए मंगलवार को सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। जिले में छह माह से ऊपर के करीब सात हजार बच्चों को खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार कराया गया।

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) डीके सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता छह माह से ऊपर के बच्चों का अन्नप्राशन करा रही हैं और माताओं को पूरक आहार के बारे में न केवल जानकारी दे रही हैं बल्कि इसे तैयार करने की प्रशिक्षण भी दे रही हैं। उन्होने बताया कि बच्चों के सर्वांगीर्ण विकास के लिए छह माह तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद अर्द्ध ठोस आहार आवश्यकतानुसार शुरू करना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में फल, सब्जी आदि की प्यूरी बनाकर खिलाना चाहिए।

प्रभारी सीडीपीओ लालिमा पाण्डेय ने बताया कि आदर्श ब्लॉक सेवापुरी के अंतर्गत आदमपुरा, अमीनी, मटुका, बाजारकालिका, बरौरा, शंभुपुर, देईपुर, करधना, हरिभानपुर, पुरन्दरपुर, बेसहुपुर, रसूलहा, मन्हगीपुर, भटौली, गोसाईंपुर, महाराजपुर, पूरे खरगूपुर इत्यादि 246 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण पंचायत समिति के सदस्यों की उपस्थिति में अन्नप्राशन दिवस मनाया गया।

इस दौरान छह माह पूर्ण करने वाले लगभग 250 बच्चे का अन्नप्राशन किया गया। उनका वजन लिया गया तथा ग्रोथ मॉनिटरिंग की गई। ऊपरी आहार खिलाने के महत्व एवं उनकी आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। बच्चे को आयु के अनुसार पहले मसला हुआ खिचड़ी, दलिया आदि को खिलाएं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हो उसके आहार को बढ़ाएं और एक छोटी चम्मच घी भी डालें। साथ में दो वर्ष तक स्तनपान भी कराएं। साफ सफाई का ध्यान दें।

लाभार्थियों के बोल : आंगनबाड़ी केंद्र बाजारकालिका पर रुचि अपनी सात माह की बच्ची रोली लेकर पहुंचीं। वहाँ उसका अन्नप्राशन हुआ। रुचि ने कहा कि छह माह बाद बच्चों को क्या और कितनी मात्रा में खिलाना है, यह पता नहीं रहता है। जिसके बारे में विस्तार से जानकारी मिली जो काफी लाभदायक है। साथ ही उन्हें प्रोटीन, आयरन और कैल्शियम युक्त भोजन लेने की सलाह दी गई। प्रियंका की पुत्री प्रिया का भी अन्नप्राशन हुआ।

उन्होने सीखा कि जब भी बच्चा भूखा होने का संकेत करे तो उसे तुरंत स्तनपान कराएं। शुरुआत में ऊपरी आहार दो से तीन छोटे चम्मच नरम भोजन, जैसे दलिया, ठीक से मसली हुई सब्जी या दाल, रोजाना दिन में दो से तीन बार दें और धीरे-धीरे आहार की मात्रा और गरिष्ठता बढ़ाते रहें। इसी तरह रेनू के पुत्र प्रियांश, प्रीति के पुत्र शिवांश, अनिता के पुत्र अयान का भी अन्नप्राशन हुआ ।

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