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वाराणसी : कालाजार उन्मूलन के लिए जागरूकता व सोशल मोबिलाइज़ेशन जरूरी, “दो हफ्ते से ज्यादा बुखार आये तो हो सकता है कालाजार”

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वाराणसी। “अगर दो हफ्ते से अधिक समय से बुखार है, लगातार वजन घट रहा है, कमजोरी और थकान रहती  है, प्लीहा और लीवर बढ़ रहा है, लासिका ग्रंथियों में सूजन आ रही है तो यह  कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि जल्द से जल्द इन लक्षणों की पहचान कर जांच कराएं  और तुरंत उपचार शुरू करें । यह तभी संभव होगा जब समुदाय में कालाजार के प्रति जागरूकता के साथ मोबिलाइज, सूचना, शिक्षा व संचार (आईईसी) तथा सामुदायिक  व्यावहारिक परिवर्तन (बीसीसी) बेहतर किया गया हो”। यह बातें शुक्रवार को कालाजार उन्मूलन के तहत सोशल मोबिलाइज़ेशन को लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कही गईं।

मलदहिया स्थित एक होटल में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत कालाजार उन्मूलन को लेकर शुक्रवार को दो दिवसीय प्रशिक्षकों के  प्रशिक्षण (टीओटी) की शुरुआत हुई।  प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की अपर निदेशक, भारत सरकार डॉ नूपुर रॉय, झारखंड स्टेट आईईसी कंसल्टेंट डॉ नीलम कुमार एवं डब्ल्यूएचओ एनटीडी के राज्य स्तरीय समन्वयक डॉ अभिषेक पॉल* ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह प्रशिक्षण प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) इंडिया के सहयोग से उत्तर प्रदेश व झारखंड के जिला वेक्टर जनित रोग कंसल्टेंट, वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक व मलेरिया निरीक्षक को दिया गया।

इस अवसर पर अपर निदेशक डॉ नूपुर रॉय ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कालाजार प्रभावित उत्तर प्रदेश के वाराणसी सहित 11 जिले व झारखंड के चार जिलों को कालाजार उन्मूलन के लिए समुदाय को इस रोग के प्रति मोबिलाइज करना, आईईसी के माध्यम से जागरूकता संदेशों के जरिये सामुदायिक  व्यावहारिक परिवर्तन करना है। इसके लिए आशा कार्यकर्ता के साथ अन्य विभाग एवं  सहयोगी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है जो समुदाय को जागरूक करने का कार्य करेगी, जिससे कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को इसी वर्ष हासिल किया जा सके।

उन्होने कहा कि कालाजार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में बालू मक्खी के काटने से फैलने वाली संक्रामक एवं घातक बीमारी है। सभी सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केन्द्रों पर कालाजार की जांच व इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। कालाजार गंभीर स्थिति में पहुँच जाने पर सरकार द्वारा कालाजार सामान्य रोगी को उपचार के बाद 500 रुपये एवं पीकेडीएल (त्वचा का कालाजार) रोगी को 4000 रुपये और सहयोगी आशा को 500 रुपये देय है।

डॉ नीलम कुमार ने कहा कि साल 1991 से कालाजार नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पहले जांच की सुविधाएं कम थीं  तो इसके ठीक होने की दर भी कम थी। इसके साथ ही जानकारी व जागरूकता का अभाव था, लेकिन जानकारी व जागरूकता के बढ़ने से वर्तमान में कालाजार प्रभावित हर राज्य व जिले में शीघ्र जांच व उपचार की सुविधाएं मौजूद हैं, ताकि जल्द से जल्द इस रोग को ठीक किया जा सके।

उन्होने कहा कि शीघ्र जांच, निदान व उपचार के लिए आईईसी और बीसीसी की अहम भूमिका होती है। डॉ अभिषेक पॉल ने कहा कि कालाजार बालू मक्खी के काटने से होता है। यह बालू मक्खी सिर्फ इंसान को ही काटती है। यह किसी जानवर या मच्छर से नहीं फैलता है। यह बालू मक्खी मिट्टी के घर, नमी वाले स्थान, दीवारों की दरार, बांस के झुंड, चूहों के बिल एवं अंधेरी वाली जगहों पर पायी जाती है।

कालाजार के लक्षण

दो हफ्ते से ज्यादा बुखार रहना, चमड़ी का कालापन, पेट में सूजन, खून की कमी, भूख न लगना, वजन में कमी, कमजोरी व थकान एवं सूखी, पतली व परतदार त्वचा।

प्रशिक्षण के दौरान सभी प्रशिक्षकों की सोशल मोबिलाइज़ेशन व सामुदायिक भागीदारी के लिए गतिविधियां कराई गई। इसमें कालाजार प्रभावित जिलों के पाँच समूह बनाए गए। इसमें उन्होने आईईसी डिस्प्ले मटेरियल जैसे पोस्टर, बैनर, पम्फ़्लेट्स, हैंडबिल्स आदि के स्पष्ट संदेश प्रदर्शित किए। इस दौरान कालाजार के लक्षण, कारण, बालू मक्खी वाहक, निदान व उपचार आदि के बारे में अलग-अलग तरह से संदेश प्रदर्शित किए।

इसके साथ ही सेंटर फॉर एडवोकेसी  एंड रिसर्च (सीफार) की ओर से कालाजार रोग से ठीक हुए मरीजों को एक चैम्पियन के रूप में समुदाय के समक्ष ले जाना और  इस रोग के बारे में उनके अनुभव को साझा कर पूरा उपचार कराने के लिए प्रेरित करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।

इस मौके पर पीसीआई से नेशनल प्रोजेक्ट मैनेजर रनपाल सिंह, यूपी स्टेट प्रोग्राम मैनेजर ध्रुव सिंह, झारखंड स्टेट प्रोग्राम मैनेजर कलाम खान, झारखंड स्टेट ट्रेनिंग कंसल्टेंट बिनय कुमार, झारखंड स्टेट कालाजार कंसल्टेंट डॉ मोहम्मद अंजुम इकबाल, यूपी रीज़नल कोओर्डिनेटर विकास द्विवेदी, झारखंड रीज़नल कोओर्डिनेटर अमरेश, रोहित, अनिल, अनीश, पीसीआई कालाजार कंसल्टेंट डॉ एसएन पांडे, ट्रेनिंग कंसल्टेंट शाल्वी, विधि, सीफार से स्टेट प्रोग्राम कोओर्डिनेटर डॉ सतीश पांडे, जिला समन्वयक दीप नारायण पांडे एवं प्रशून द्विवेदी व अन्य लोग मौजूद रहे।

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