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वाराणसी : दत्तक पुत्र को 8 साल की कठोर सजा, 7 साल पहले पिता पर हसिया से किया था वार, इलाज के दौरान हो गई थी मौत

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वाराणसी। हत्या के प्रयास में 7 साल तीन माह पहले आरोपी दत्तक पुत्र को वाराणसी की एएसजे / एसीसी-III की अदालत ने संपत्ति के लालच में पिता की हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी दत्तक पुत्र प्रमोद कुमार उर्फ बबलू को दोषी पाया है। साक्ष्य के आधार पर अदालत ने अभियुक्त प्रमोद कुमार उर्फ बबलू को 8 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। वही अभियुक्त यदि अर्थदंड नही देता है तो एक माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

2014 में पिता पर हंसिया से किया था वार

मिर्जामुराद थाने में 15 अक्टूबर 2014 को मिल्कीपुर निवासी जगदीश प्रसाद ने प्रमोद कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जगदीश के अनुसार उनके बड़े पिता सहदेव राम अपने घर से मिल्कीपुर चट्‌टी की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें बाइक पर सवार उनका दत्तक पुत्र प्रमोद कुमार मिला। प्रमोद अपने पिता को देखते ही बाइक रोक दिया तो वह भी रुक गए। इसके बाद बाइक की डिग्गी से हंसिया निकाल कर प्रमोद ने सहदेव के गले पर ताबड़तोड़ वार कर दिया था। सहदेव की चीख सुनकर ग्रामीण भाग कर घटनास्थल पर आए तो प्रमोद बाइक स्टार्ट कर भाग निकला।

दरअसल, सहदेव कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे तो प्रमोद उनकी संपत्ति पर जल्द से जल्द काबिज होना चाहता था। बात न बनने पर उसने पिता को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी।

मौत के बाद पुलिस ने बढ़ा दी थी धारा

प्रमोद के जानलेवा हमले के बाद आनन-फानन सहदेव राम को मंडलीय अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। अस्पताल में उपचार के दौरान कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई थी। सहदेव की मौत के बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास के आरोप में दर्ज मुकदमे को हत्या की धारा में तरमीम कर दिया था। अदालत ने गवाहों के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य व पत्रावलियों का अवलोकन करने के साथ ही दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रमोद कुमार को हत्या के प्रयास में दोष सिद्ध किया। इसके साथ ही उसे 8 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई।

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