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UP Election 2022 : विकास के मुद्दे से भटकी राजनीतिक पार्टियां, जातिवाद पर डाल रहे सभी दल डोरे

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा 2022 (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) की तारीख और नजदीक आ रहा हैं। वैसे-वैसे सभी राजनीतिक दल जनता को लुभाने के लिए तरह-तरह की घोषणाएं कर लोगों को अपनी ओर लुभाने का प्रयास कर रहे है। ऐसे भी इस बार के विधानसभा चुनाव में विकास विकास की मुद्दे से आगे चल रही थी। मगर अब यह मुद्दा बेअसर दिखता जा रहा है। सभी दल एक बार फिर राजनीतिक दलों की सियासत जातीय मुद्दे पर आकर अटक गयी है। सपा (SP), बसपा (BSP), सुभासपा(SBSP), भाजपा(BJP), कांग्रेस(Congress) और अन्य राजनीतिक दलों के लिए दलित फिर से महत्वपूर्ण हो गए हैं।

यूपी में 20 से 21 फीसद हैं दलित जाती के वोट

दरअसल, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंकड़े बताते हैं जिस भी दल ने 86 रिजर्व सीटों में सर्वाधिक भागीदारी बनायी उसी की सरकार बनी है। इसीलिए दलित वोट बैंक में सेंधमारी के लिए सभी पार्टियां जुटी हैं। बता दे कि यूपी करीब में 42-45 फीसदी ओबीसी, जबकि 20-21 फीसदी दलितों के वोट हैं। इसमें बड़ी संख्या जाटव की है, यह करीब 54 फीसदी हैं। दलितों की 66 जातियां हैं। जिनमें 55 ऐसी उपजातियां हैं, जिनका संख्या बल ज्यादा नहीं हैं। इसमें मुसहर, बसोर, सपेरा और रंगरेज शामिल हैं। 20-21 फीसदी को दो भागों में बांट दें, तो 14 फीसदी जाटव हैं और बाकी की संख्या 8 फीसदी है।

42 जिलों में 20 फीसद दलित, 86 सीटें है आरक्षित

जाटव के अलावा दलितों की अन्य जातियों में पासी 16 फीसदी, धोबी, कोरी और वाल्मीकि 15 फीसदी और गोंड, धानुक और खटीक करीब 5 फीसदी हैं। यूपी के 42 ऐसे जिलें हैं, जहां दलितों की संख्या 20 प्रतिशत से अधिक है। यूपी में दलित समुदाय के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 86 है। अब तक के आंकड़ा यही बताते हैं कि जिस दल ने सबसे ज्यादा आरक्षित सीटें जीती हैं, उसी दल ने उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाली है। अधिक आरक्षित 2017 में रिजर्व सीटों का गणित

कुल सीटें-86 : भाजपा-70, सपा-07, सुभासपा-03, अपना दल-03, बसपा-02, निर्दल-01

बसपा सुप्रीमो मायावती दलितों की बड़ी नेता

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती (Mayawati) सबसे बड़ी नेता हैं। उत्तर प्रदेश में वह चार बार सत्ता संभाल चुकी हैं। वही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में बेबीरानी मौर्य सुरेश पासी, रमापति शास्त्री, गुलाबो देवी और कौशल किशोर और विनोद सोनकर तो कांग्रेस के पास आलोक प्रसाद और पीएल पुनिया जैसे नेता हैं। इंद्रजीत सरोज समाजवादी पार्टी (सपा) में बड़े नेता है।

बसपा हुई कमजोर

वर्ष 2007 में मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले से 30.43 फीसदी वोटों के साथ 206 सीट हासिल की थीं। 2009 के लोकसभा चुनावों में भी बसपा 27.4 फीसदी वोट के साथ 21 सीटें जीतने में सफलता मिली। वर्ष 2012 में बसपा को सिर्फ 25.9 फीसदी वोट मिले। इसकी सीटें 206 से गिरकर 80 पर पहुंच गईं। 2014 के लोकसभा चुनावों में बसपा को 20 फीसदी वोट मिले और उसका खाता भी नहीं खुला। 2017 में 23 फीसदी वोट के साथ बसपा को सिर्फ 19 सीटें मिलीं। अब सिर्फ उसके पास 7 विधायक बचे हैं।

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद से मिली सपा को ताकत

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (Bhim Army President Chandrashekhar Aajad) की आजाद समाज पार्टी ( Aazad Samaj Party) पश्चिमी यूपी में जाटव वोटों को लुभा रही है। शुक्रवार को चंद्रशेखर आजाद ने समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मुलाकात कर सपा को अपना समर्थन दिया है। चंद्रशेखर के सपा के साथ जाने से मायावती की पूरी चुनाव गणित बिगड़ सकती है।

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