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UP Assembly Election 2022 : आजमगढ़ से BSP ने मैदान में उतारा बाहुबली भूपेंद्र सिंह को, अपने ही बनाए जाल में फस सकती है सपा

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आजमगढ़। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर चुनाव आयोग ने घोषणा कर चुकी है। सभी राजनीतिक दलों में उम्मीदवारों के टिकट के लिए घमासान मची हुई है। ऐसे भी यूपी में कुछ राजनीतिक दल गठबंधन भी किये हुए है। ऐसे में गठबंधन की राजनीति में दावेदार टिकट कटने के डर से सहमें हुए हैं तो दूसरा दल छोड़कर आये नेता टिकट के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। इसी क्रम में जनपद आजमगढ़ की दीदारगंज विधानसभा में टिकट को लेकर घमासान मची हुई है। जिसमें अब तक लो है। ऐसे सबसे अधिक खींचतान समाजवादी पार्टी में दिख रही है।

आपको बता दें कि साल 2007 तक दीदारगंज विधानसभा सुरक्षित थी। इसे सरायमीर के नाम से जाना जाता था। इसके बाद हुए परिसीमन में वर्ष 2012 में नाम बदलकर दीदारगंज कर दिया गया। इसके साथ ही इसे सुरक्षित से अनारक्षित कर दिया गया। सामान्य होने के बाद सपा-बसपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला था। सपा के आदिल शेख ने इस सीट से जीत हासिल की थी। उन्होंने बसपा के कद्दावर नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर को करीब 2,700 मतों से पराजित किया था।

वही इससे पहले साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी दोनों ही प्रत्याशियों के बीच मुकाबला देखने को मिला लेकिन बाजी सुखदेव राजभर के हाथ लगी थी। समाजवादी पार्टी के आदिल शेख को हार का सामना करना पड़ा था। सपा वर्ष 2022 में इस सीट को किसी भी हालत में जीतना चाहती है। सपा से पूर्व विधायक आदिल शेख, पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा, पूर्व मंत्री डा. राम दुलार राजभर दावेदारी कर रहे थे।

इस सीट मुस्लिम और राजभर मतदाता सर्वाधिक हैं इसलिए टिकट की लड़ाई सीधे तौर पर रामदुलार और आदिल शेख के बीच थी लेकिन परिस्थिति तब बदली जब दो माह पूर्व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने अखिलेश को पत्र लिखकर उन्हें पिछड़ों का सबसे बड़ा नेता करार दिया और अपने पुत्र कमलाकांत को सपा में शामिल करने की बात कही।

कमलाकांत इस उम्मीद से सपा में शामिल हुए कि उन्हें टिकट मिलेगा। इसी बीच सुखदेव राजभर का निधन होने से यह सीट खाली हो गयी। सपा ने सुभासपा से गठबंधन कर लिया। चुंकि इस विधानसभा में 70 हजार राजभर वोट है इसलिए ओमप्रकाश भी इस सीट की डिमांड कर रहे हैं। अब सपा के सामने दुविधा की स्थिति है। कमलाकांत के साथ पिता के निधन की वजह से सहानुभूति हैं। वहीं तीन दावेदार पहले से मौजूद हैं। अगर पार्टी सीट सुभासपा को देती है तो कमलाकांत सहित चारों की दावेदारी समाप्त हो जाएगी। नहीं देते हैं तो भी पार्टी के तीन दावेदार नाराज होंगे।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने बाहुबली भूपेंद्र सिंह (मुन्ना ठेकमा) को मैदान में उतार ऐसे भी विपक्ष की मुश्किल बढ़ा दी है। वर्ष 2012 में अगर आदिल शेख चुनाव जीते थे तो उसमें मुन्ना का बड़ा योगदान था। अब मुन्ना खुद मैदान में हैं। वहीं बीजेपी से कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा का लड़ना तय माना जा रहा है। कांग्रेस भी किसी पिछड़ी जाति के नेता को उम्मीदवार बना सकती है। एसे में सपा के सामने बिकट स्थिति उत्पन्न हो गयी है। अपनों की नाराजगी पार्टी पर भारी पड़ सकती है।

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