Home राज्य उत्तर प्रदेश वाराणसी : बालू मक्खी से बचाव के लिए अर्जुनपुर व हरपालपुर में...

वाराणसी : बालू मक्खी से बचाव के लिए अर्जुनपुर व हरपालपुर में ‘आईआरएस’ छिड़काव, CMO बोले- कालाबाजार उन्मूलन के लिए सरकार बेहद गम्भीर

0

वाराणसी। कालाजार समेत अन्य संचारी रोगों से बचाने के लिए आदर्श ब्लॉक सेवापुरी के अर्जुनपुर व काशी विद्यापीठ के हरपालपुर गांव में कीटनाशक दवा का छिड़काव (इंडोर रेसीडूअल स्प्रेइंग-आईआरएस) किया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि कालाजार उन्मूलन के लिए सरकार बेहद गंभीर है। जिले के दो ब्लॉक सेवापुरी व काशी विद्यापीठ के दो गांव अर्जुनपुर व हरपालपुर कालाजार प्रभावित हैं। यहां कालाजार रोग की वाहक बालू मक्खी से छुटकारा दिलाने के लिए आईआरएस का छिड़काव किया जा रहा है। उन्होने कहा कि हर नागरिक को इस बीमारी की गंभीरता को समझते हुए अपने आस-पास स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए और अगर स्वयं या किसी में कालाजार से संक्रमित होने के लक्षणों का आभास हो तो तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य प्रदाताओं से संपर्क स्थापित करना चाहिए।

जिला मलेरिया धिकारी शरद चंद पांडे के नेतृत्व में मलेरिया निरीक्षक अभिषेक तिवारी, वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक विनोद कुमार छिड़काव निरीक्षण का कार्य कर रहे हैं। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि अर्जुनपुर में 21 से 26 मार्च तक छिड़काव का कार्य किया जा चुका है वहीं हरपालपुर में सोमवार से शुरू किया गया है।

प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ यतीश भुवन पाठक ने बताया कि सेवापुरी पीएचसी की टीम व ग्राम प्रधान के सहयोग से रामडीहा उपकेंद्र के अर्जुनपुर गाँव में 21 से 26 मार्च तक आईआरएस छिड़काव किया गया। गाँव के करीब 350 घरों में छिड़काव किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य निरीक्षक संदीप भारती, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक दिनेश गुप्ता, ग्राम प्रधान विमला देवी, आशा कार्यकर्ता सरिता, मुन्नी ने सहयोग किया।

शीघ्र निदान व उपचार के साथ छिड़काव जरूरी

कालाजार उन्मूलन की वर्तमान रणनीति के मुख्य रूप से दो स्तम्भ हैं पहला शीघ्र निदान और उपचार, दूसरा कीटनाशक दवा का छिड़काव यानि आईआरएस, आईआरएस एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा घर के अन्दर की दीवारों और घर में जानवरों के लिए बनाए गए आश्रय स्थलों पर दवा का छिड़काव किया जाता है ताकि, कालाजार बीमारी का कारण बनने वाली बालू मक्खी से बचाव किया जा सके। कीटनाशक का छिड़काव बालू मक्खी की संख्या को कम करता है। कीटनाशक का छिड़काव यदि सभी हिस्सों में नहीं किया गया हो तो बालू मक्खी बिना छिड़काव वाले सतह पर रह जायेगी और उसे कोई नुकसान नहीं होगा।

एक साल से नहीं मिला कोई नया मरीज

जिले के काशी विद्यापीठ ब्लॉक में साल 2008 व 2009 में कालाजार के रोगी पाए गए थे, उसके बाद साल 2017 तक कालाजार के रोगी नहीं पाए गए। लेकिन साल 2018 में काशी विद्यापीठ के हरपालपुर गांव में दो और साल 2021 में सेवापुरी के अर्जुनपुर गांव में कालाजार का एक मरीज पाया गया था । इसके बाद अब तक कालाजार का एक भी मरीज नहीं पाया गया। कालाजार प्रभावित गांवों में समय-समय पर कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here