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वाराणसी में मिशन इंद्रधनुष का तीसरा चरण शुरू

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वाराणसी। सघन मिशन इंद्रधनुष (आईएमआई-4.0) के तहत नियमित टीकाकरण से छूटे दो वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती को प्रतिरक्षित करने के लिए अभियान का तीसरा चरण गुरुवार से शुरू हुआ। अभियान का शुभारंभ जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) डॉ वीएस राय व वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ एके पांडे ने शहरी पीएचसी दुर्गाकुंड के अंतर्गत खोजवां स्थित आदर्श पुस्तकालय में आयोजित टीकाकरण सत्र से किया। इस दौरान उन्होने बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई।

अभियान के निरीक्षण के लिए राज्य स्तरीय टीम ने पिंडरा ब्लॉक का भ्रमण किया, जिसमें राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एके घई, डॉ दीप ठक्कर, सरोज कुमार एवं कृष्णा चौधरी शामिल रहे। इसके साथ ही राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एके घई ने शाम को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी, डीआईओडॉ वीएस राय व वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ एके पांडे एवं अन्य चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक की, जिसमें प्रमुख रूप से नियमित टीकाकरण को लेकर विस्तार से जानकारी ली गयी और कुछ जरूरी दिशा-निर्देश भी दिये गए।

सीएमओ डॉ चौधरी ने बताया कि आईएमआई 4.0 का तीसरा चरणगुरुवार से शुरू होकर पूरे एक सप्ताह तक चलाया जाएगा, जिसमें छूटे हुये दो वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती का टीकाकरण किया जाएगा। इसके साथ ही कोविड टीकाकरण अभियान भी आईएमआई के सत्रों में चलाया जाएगा। उन्होने बताया कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में जहां भी आईएमआई का टीकाकरण सत्र चल रहा है वहाँ लोगों का कोविड टीकाकरण भी किया जाएगा। आईएमआई के साथ कोविड टीकाकरण संचालित करने का यही उद्देश्य है कि एक ही समय में बच्चों का नियमित टीकाकरण हो जाए और कोविड टीकाकरण भी हो जाए।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि आईएमआई 4.0 के तीसरे चरण के लिए जिले के छूटे  दो वर्ष तक के 16,426 बच्चों एवं 3400 गर्भवती का टीकाकरण के लिए लक्षित किया गया है। इसके लिए 2344 सत्र आयोजित किए जाएंगे।अभियान में गर्भवती को टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका लगाया जाएगा। यह टीका गर्भवती को दिये जाने से उनका व उनके गर्भस्थ शिशु का टिटनेस व डिप्थीरिया (गलघोंटू) रोग से बचाव करता है। इसके साथ ही बच्चों को 11 बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाया जाता है जिनमें डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटेनस, पोलियो, क्षय (टीबी), हेपेटाइटिस-बी, मैनिंजाइटिस, निमोनिया, हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी संक्रमण, डायरिया रोटा वायरस और खसरा-रूबेला (एमआर) शामिल है।

इस मौके पर डबल्यूएचओ के एसएमओ डॉ जयशीलन, यूनीसेफ के प्रदीप विश्वकर्मा, डॉ शाहिद, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के समस्त प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

पिछले चरणों की उपलब्धि

आईएमआई के पहले चरण (मार्च 2022) के लिए जनपद में छूटे हुये 15,734 बच्चों व 3826 गर्भवती का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से 21,402 (136%) बच्चों व 4829 (126%) गर्भवती को टीका लगाया गया। इसके लिए पूरे जनपद में 2,245 (108%) टीकाकरण सत्र आयोजित किए गए। दूसरे चरण (अप्रैल 2022) के लिए जनपद में छूटे हुये 16,810 बच्चों व 3800 गर्भवती का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से 16,820 (100%) बच्चों व 4141 (109%) गर्भवती को टीका लगाया गया। इसके लिए पूरे जनपद में 1,959 (84%)टीकाकरण सत्र आयोजित किए गए।

पाँच साल – सात बार, टीका न छूटे एक भी बार

टीकाकरण एक सतत प्रक्रिया है जो कि जन्म से लेकर पाँच वर्ष तक सम्पादित की जाती है।

• जन्म के समय बच्चों को हेपेटाइटिस बी संक्रमण से बचाने के लिये एवं पोलियो वैक्सीन की जीरो डोज खुराक एवं बी०सी०जी० की वैक्सीन दी जाती है।

• तत्पश्चात बच्चे की आयु डेढ़ माह, ढाई माह एवं साढ़े तीन माह होने पर डिप्थीरिया, कालीखांसी, टिटनेस, रोटावायरस, डायरिया, हेपेटाइटिस बी, हेमेसिफिलस संक्रमण एवं न्यूमोकोकल वैक्सीन, न्यूमोकोकल इन्फेक्शन के संक्रमण से बचाने के लिये टीका लगाया जाता है।

• इसके साथ ही नौ महीने की उम्र पूरी होने पर 10वें महीने पर मिजिल्स एवं रूबेला की वैक्सीन तथा 16-24 महीने पर मिजिल्स रूबेला की सेकेण्ड डोज दी जाती है।

• इसके बाद 16 से 24 माह पर डिप्थीरिया, कालीखॉसी एवं टिटनेस के संक्रमण से बचाव के लिये डी०पी०टी० वैक्सीन की बूस्टर डोज़;

• एवं पुनः 05 वर्ष पूर्ण होने पर डी०पी०टी० की दूसरी बूस्टर खुराक दी जाती है।

• किशोर एवं किशोरियों को 10 वर्ष एवं 16 वर्ष की उम्र पर डिप्थीरिया एवं टिटनेस से बचाव के टीके दिये जाते हैं।

• इस प्रकार एक ही टीकाकरण के विभिन्न वैक्सीन देने का समय निर्धारित किया गया है। एवं बच्चे को सभी वैक्सीन मिल जाये इसके लिये उन्हें विभिन्न आयु पर 07 बार टीकाकरण केन्द्र के लिए ले जाना होता है।

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