Home राज्य उत्तर प्रदेश वाराणसी : खुशबू पांचाल का कथक दर्शकों को खूब भाया, अंतिम प्रस्तुति...

वाराणसी : खुशबू पांचाल का कथक दर्शकों को खूब भाया, अंतिम प्रस्तुति सन्तूर और तबला की जुगलबंदी से उपस्थित श्रोताओं में गजब का दिखा उत्साह

98
0
देखे वीडियो

वाराणसी। इंटरनेशनल परफॉर्मिन्ग आर्ट्स फेस्टिवल (IPAF) दिल्ली एवं संस्कार भारती मानस गंगा वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में लोक कलाओं को समर्पित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन रविवार को न्यू अस्सी घाट के के सुबह-ए-बनारस के मंच पर लोक कला उत्सव की आज द्वितीय संध्या का आगाज हुआ।

इस कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक रीति नीति से दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद उड़ीसा डॉक्टर अमर पटनायक, अवधेश मिश्रा, कार्यकारी अध्यक्ष संस्कार भारती उत्तर प्रदेश, विशिष्ट अतिथि गण में योगी प्रकाश नाथ योगेश्वर, दीपक अस्थाना, प्रेसिडेंट रोटरी क्लब रहे।

इस कार्यक्रम के प्रथम प्रस्तुति करमा नृत्य रही। वनों में रहने वाले जनजातियों वनवासियों ने लय, ताल, सुर को नृत्य में पिरो कर अपने ईश्वर के सम्मुख अपनी पूजा प्रस्तुत की। वही मध्य प्रदेश महाकाल की नगरी उज्जैन से आई कत्थक नृत्यांगना डॉक्टर खुशबू पांचाल की कथक प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। शिव स्तुति से प्रारंभ कर ठुमरी और लालित्य पूर्ण माखन चोरी की नटखट प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया।

तीसरी और अंतिम प्रस्तुति में संतूर के विश्व प्रसिद्ध कलाकार पंडित अरुण भट्टाचार्य ने आलाप, जोड़, झप ताल 10 मात्राओं, तीन ताल 16 मात्रा में निबंध दोनों रचनाएं प्रस्तुत की। साथ में विश्व विख्यात तबला वादक पंडित राम कुमार मिश्र का उन्हें सफल सहयोग मिलता रहा। दोनों कला साधकों की सभी जुगलबंदी से उपस्थित श्रोताओं में गजब का उत्साह दिखा लगातार करतल ध्वनि से कलाकारों को उर्जा से लवरेज कर दिया प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने उपस्थित दर्शकों से संगीत से संबंधित वाद संवाद कर उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।

इस संदर्भ में मीडिया से बात करते हुए राज्यसभा सांसद डॉ० अमर पटनायक ने कहा बाबा विश्वनाथ की नगरी बहुत ही अद्भुत है मैं यहां आना चाहता था मैं जहां पर रहता हूं वहां पर लिंगराज महा प्रभु है वह भी शिवजी के एक रूप हैं मैं इसलिए यहां पर आना चाहता था कि श्री काशी विश्वनाथ, संकट मोचन के दर्शन करु तो जो यह आज मुझे सहयोग मिला है इससे मैं बहुत प्रसन्न हूं मुझे यह खुशी भी है आज यह जो प्रयास यहां आईपीएफ कर रहा है उसमें भारत का आइडेंटिटी है भारतवर्ष का हर भारतीय का इसी में आईडेंटिटी है इसी परंपरा को जीवित करने के लिए यह कार्यक्रम किए जा रहे हैं मुझे इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जो चांस मिला है बहुत प्रसन्न हूं और मैं खुशी व्यक्त करता हूं।

वह इस कार्यक्रम में कथक नृत्यांगना डॉक्टर खुशबू पांचाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि यहां आकर मुझे बहुत ही अच्छा लगा यहां मेरा पहला विजिट है चाहूंगी कि इस काशी विश्वनाथ की नगरी में हर बार आने का अवसर प्राप्त हो यहां बहुत ही सुकून का अहसास है अस्सी घाट का जो इतना बहुत बड़ा भव्य मंच है नित्य करना एक अलग ही अनुभूति मिलता है। उन्होंने कहा कि मैं भी बनारस घराने से ताल्लुक रखती हूं। इसीलिए मेरे सौभाग्य का विषय है। यहां अपने नृत्य प्रस्तुत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

उन्होंने कहा कि जो कला जगत है जो कलाकार है उन को सबसे ज्यादा प्रेम होता है वह मंच से होता है और अपनी साधना और कला से होता है। जो कलाकार हम लोग होते हैं उनकी कलाई एक भाषा होती है जिससे हम दर्शकों से बात करते हैं इस तरह के कार्यक्रम है निरंतर होते रहे जिससे हम सभी को प्रोत्साहन मिलता रहे और हम दर्शकों से रूबरू हो सकें।

उन्होंने कहा कि पिछले 2 वर्षों से कोरोना से हम लोगों को जो ऑनलाइन घर पर मंच हमारी साधना करी उसमें कार्यक्रम किए परंतु अब स्थिति नॉर्मल हो चुकी है। अब इस तरह के कार्यक्रम होते रहे जो 2 साल का कोटा था। उसे हम लोग अब पूरा करना चाहते हैं। इस तरह के मंच मिलते रहे हम कलाकार खुश होते रहें।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का कुशल संचालन काशी की प्रतिष्ठित संचालनकत्री अंकिता नादान ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आइपीएफ के निदेशक श्याम पांडेय ने किया।

इस अवसर पर प्रमोद पाठक, वेद प्रकाश शर्मा, नागेश्वर सिंह, रजनीश उपाध्याय, रामआशीष पांडेय, बृजमोहन यादव, अरविन्द राय, संदीप चतुर्वेदी, सुशील शर्मा, कौस्तुभ भट्ट, परितोष नारायण सिंह, अवधेश पांडेय, पुष्प लता द्विवेदी, साक्षी त्रिपाठी, पूनम सैनी, रितिक वर्मा, रामाज्ञा पांडेय, प्रवीण मिश्र, मिठाई लाल यादव, सुबह-ए-बनारस के सुनील शुक्ल, IPAF नई दिल्ली से खुशी चौहान, वैभव जोशी आदि उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here