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वाराणसी : वृद्धजन दिवस पर स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित किए जनजागरूक कार्यक्रम, मंडलीय चिकित्सालय व राजकीय वृद्ध व अशक्त महिला गृह में लगा स्वास्थ्य शिविर

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वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन जागरूक गतिविधियों का आयोजन किया गया। सीएमओ डॉ० संदीप चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम के दृष्टिगत उनके सम्मान और देखभाल के प्रति लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस हर साल एक अक्टूबर को मनाया जाता है । खासतौर से उनकी सुविधाओं और समस्याओं पर विचार किया जाता है, एवं उनके स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता से ध्यान दिया जाता है।

इस क्रम में कबीरचौरा स्थित एसएसपीजी मंडलीय चिकित्सालय में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। इस दौरान वृद्धजनों को स्वास्थ्य देखभाल की पुस्तिका भी वितरित की गई।

मंडलीय चिकित्सालय में स्थित वृद्धजन स्वास्थ्य देखभाल वार्ड के प्रभारी व वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ० आरएन सिंह ने बताया कि हर रोज ओपीडी में 50 से 60 मरीज आते हैं जिनमें उच्च रक्तचाप, शुगर, लकवा, हड्डी से संबन्धित समस्या, कैंसर, कमर दर्द आदि समस्याएं देखने को मिलती है। कोरोना काल में अकेलेपन, चिंता, अवसाद का काफी प्रभाव बुजुर्गों पर पड़ा है जिससे कारण उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं झेलनी पड़ीं। कई परिवार वालों ने उनका साथ दिया तो कईयों ने उन्हें वृद्धाश्रम भेज दिया। उन्होने कहा कि बुजुर्गों को कभी अकेला न छोड़ें, उनका विशेष ध्यान रखें। संतुलित आहार के साथ-साथ लगातार योग तथा व्यायाम करते रहें।

साफ-सफाई, स्वच्छता का भी ध्यान रखें। बदलते मौसम में स्वास्थ्य का ख्याल रखें। शिविर में एसआईसी डॉ० घनश्याम मौर्य, अधीक्षक डॉ० वीएस त्रिपाठी, डॉ० निशांत चतुर्वेदी ने भी मरीजों को आवश्यक परामर्श दिया। इस दौरान स्टाफ नर्स व अन्य स्टाफ मौजूद रहा।

दूसरी ओर दुर्गाकुंड स्थित राजकीय वृद्ध व अशक्त महिला गृह में बुजुर्ग महिलाओं की स्वास्थ्य जांच के लिए निःशुल्क शिविर लगाकर दवा व आवश्यक परामर्श भी दिया गया। बीएचयू अस्पताल के डॉक्टर अनूप एवं रोहित कुमार संत द्वारा वृद्ध माताओं का चिकित्सीय परीक्षण किया गया। आश्रम के प्रभारी देव शरण सिंह मौजूद थे। उन्होने कहा कि इस दिवस को मनाने का उद्देश्य बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार रोकना, उनके स्वास्थ्य की चिंता करना, समाज और परिवार में सीनियर सिटीजन की अहमियत लोगों को बताना है। इसलिए जीवन के अंतिम दिनों में बुजुर्गों को परिवार से अलग न करें, बल्कि उनका ध्यान रखें क्योंकि उनके बिना घर सूना रहता है।

महिला गृह में कई सालों से रह रहीं बिहार नालंदा की शांति देवी शर्मा (80) व कोलकाता की मीनाक्षी भट्टाचार्य (70) बताती हैं कि यहाँ काफी अच्छी देखभाल हो जाती है। समय-समय पर डॉक्टरों द्वारा स्वास्थ्य जांच और जरूरत की दवा मिल जाती है।

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