Home राज्य उत्तर प्रदेश वाराणसी : अस्सी घाट पर आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के पहले...

वाराणसी : अस्सी घाट पर आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम के पहले दिन मधुमिता के मधुर गायन से सजी शाम

109
0
यहां देखे वीडियो

वाराणसी। IPAF नई दिल्ली एवं संस्कार भारती मानस गंगा वाराणसी के संयुक्त तत्वाधान में लोक कलाओं को समर्पित दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन वाराणसी के अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस के मंच पर किया जा रहा है। जिसमें पहले दिन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) के संगीत विभाग की प्रख्यात शास्त्रीय गायिका डॉ० मधुमिता ने अपने गायन से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

वही इससे पहले इस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित एवं भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ शुरू हुआ। मंगलाचरण काशी के शीतल दास मटके वेद पाठी बटुकों ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी, महामंत्री काशी विद्वत परिषद, अध्यक्ष का संस्कार भारती उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष सनातन दुबे, विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख दीनदयाल पांडे एवं काशी के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ सुनील कुमार सा उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में प्रथम प्रस्तुति सत्तरीय नृत्य शैली में अनवेषा बरुआह ने कृष्ण वंदना प्रस्तुत की। अंत में कलकतिया चार्ली नाच और फेंको मदन गोपाल की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। दर्शकों ने भी भरपूर तालियां बजाकर कलाकार का उत्साहवर्धन किया। वही दूसरी प्रस्तुति में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की प्रख्यात शास्त्रीय गायिका डॉक्टर मधुमिता भट्टाचार्य ने राग केदार में द्रुत खयाल “रंग की सारी को छुपाई” और “चांदनी रात मोको न सुहाय” द्रुत खयाल 3 साल में प्रस्तुत किया। मिश्र पीलू राग गारा में ” लागे तोरे नैनवा का गान” और अंत में शिव भजन “शिव के मन शरण हो” गाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी।

इसके साथ ही वाराणसी के उप शास्त्रीय गायक कुमार अभिषेक ने भी अपने गायन किस शैली प्रतिभा की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। गुरु वंदनाज़ सीताराम कहो राधे श्याम कहो, गंगा तेरी अमृतधारा और अंत में अमृत महोत्सव को समर्पित भारत दर्शन गीत ” सुंदर सुभूमि भैया भारत के देशवा” भोजपुरी रचना सुनाकर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। तीसरी और आखिरी प्रस्तुति में काशी की सशक्त हस्ताक्षर अनामिका दीक्षित एवं साथियों ने “शिव की नगरी-काशी” को प्रस्तुत किया। दर्शकों ने प्रस्तुति के माध्यम से कार्तिक की महिमा देखकर आध्यात्मिक शक्ति को साक्षात महसूस किया।

वही इस संदर्भ में मीडिया से बात करते हुए डॉ० मधुमिता भट्टाचार्य ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों व प्रदेशों से आए कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित होने चाहिए, क्योंकि इससे कलाकारों के साथ ही श्रोताओं को भी बहुत कुछ सीखने व जानने को मिलता है। इधर, कुमार अभिषेक ने कहा कि आईपीएएफ की ओर से कलाकारों को मंच प्रदान किया गया। आज के समय में कलाकारों को मंच मिलना ही बहुत बड़ी बात है और यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने से कलाकार का भी विकास होता है।

नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड एवं आयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से काशी में सजी है संध्या काशी वासियों के लिए अविस्मरणीय एवं सराहनीय रही। कार्यक्रम का संचालन सुनील किशोर द्विवेदी व अन्य लोगों ने किया। इस कार्यक्रम के3 प्रारंभ में IPAF नई दिल्ली की अंजलि चौहान ने सभी अतिथियों को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत किया। वहीं धन्यवाद ज्ञापन IPAF संस्था के निदेशक श्याम पांडे ने किया।

इस अवसर पर स्वागत समिति संस्कार भारती के प्रमोद पाठक, वेद प्रकाश शर्मा, नागेश्वर सिंह, सुनील शुक्ला, आनंद चौधरी, रोहित तिवारी, बृजेश जयसवाल, राकेश यादव, रजनीश उपाध्याय, राम आशीष पांडे, बृजमोहन यादव, कशिश शाह, रोशनी यादव, आदित्य, संगीता दिवाकर, IPAF नई दिल्ली से खुशी चौहान वैभव जोशी आदि उपस्थित रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here