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छात्रावासों में ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पर दिया धरना

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वाराणसी : काशी हिन्दू विश्वविद्यालय : विश्वविद्यालय के छात्रावासों में संवैधानिक प्रावधान के तहत ओबीसी का 27% आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर की सरगर्मी बढ़ा दी है। पीछले पांच-छ: वर्ष में छात्रावासों में ओबीसी आरक्षण की जायज मांग को लेकर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदार पदाधिकारियों को दर्जनों बार ज्ञापन सौंपा है; उसके पहले छात्रावासों में ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर जो शिकायत पत्र, ज्ञापन या प्रार्थना पत्र दिया गया है, उसकी गिनती ही नहीं है। 10 जनवरी,2022 को भी छात्र-छात्राओं ने अपनी ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर कुलपति कार्यालय (सेन्ट्रल ऑफिस) का घेराव करके कुलपति के नाम ज्ञापन दिया था।

उस दिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा था कि छात्रावासों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए बनायी गयी पांच सदस्यीय कमिटी अपनी संस्तुति दे दी है, जिस पर केवल कुलपति का हस्ताक्षर होना बाकी है जो एक घण्टे में हो जायेगा और आरक्षण लागू हो जायेगा। छात्रों द्वारा कुलपति को सौंपे ज्ञापन को आज नौ दिन बीत गए, लेकिन आजतक विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उक्त मांग के संबंध में कोई ऐसी अधिसूचना जारी नहीं हुई है, जिस पर ओबीसी छात्रों को छात्रावासों में ओबीसी आरक्षण लागू करने की बात स्वीकार की गयी हो। विश्वविद्यालय प्रशासन के ढुलमुल रवैए और लगातार कर वादाखिलाफी से परेशान छात्र-छात्राओं ने हम सभी छात्र- छात्राओं ने एक बार फिर से ओबीसी आरक्षण लागू करने की अधिसूचना की जानकारी व जवाब लेने आज सेंट्रल ऑफिस पहुंच गये।

आन्दोलित छात्रों को जब मालूम चला कि कुलपति प्रो० सुधीर कुमार जैन फिर से गुजरात चले गये हैं तो छात्रों में आक्रोश भर गया और वे सब सेंट्रल ऑफिस के सामने ही धरने पर बैठ गये। करीब दो-ढाई घंटे तक छात्र सेंट्रल ऑफिस बैठे रहे, बीच-बीच में विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदार पदाधिकारियों के सामने अपनी बातें भी रखते रहे। नारेबाजी और क्रांतिकारी गीतों व कविताओं के माध्यम से अपना हौसला अफजाई करते रहे।

छात्र बार-बार अपनी मांग के संदर्भ में विश्वविद्यालय प्रशासन के जिम्मेदार पदाधिकारियों से जवाब जवाब मांग रहे थे, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के मुंह से एक टूम आवाज भी नहीं निकल रही थी; सब के सब ने दमी साध लिया था। छात्रों ने कहा कि हमारी मांग के आगे बीएचयू प्रशासन की बोलती बंद क्यों है? इस क्यों के पीछे का कारण बीएचयू कुलपति और रजिस्ट्रार सहित तमाम पदाधिकारियों की खोंट सोच और गंदी मानसिकता है। जिम्मेदार पदाधिकारियों को अपना दोगलापन चरित्र और नीयत को सुधारने की मंशा से छात्रों ने आज फिर एक बार
छात्रावासों में ओबीसी आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर कुलपति के नाम अनुस्मारक-पत्र सौंपा। छात्रों का कहना था कि यदि ये हमारी मांग को नहीं मानते हैं; अपना दोगलापन चरित्र और नीयत को नहीं सुधारते हैं तो हम भी हार नहीं मानने वाले हैं। हम कमेरों के लड़ाके संतान हैं, अपनी मांग को लेकर लड़ाई को और मजबूत करेंगे। सीर गेट और छित्तुपुर गेट पर माइक मीटिंग करेंगे। अपनी मांगों को लेकर ट्विटर पर ट्रेंड करवायेंगे। पूरे परिसर में घूम-घूमकर माइक से अपनी मांग के पक्ष में छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और प्रोफेसरों का समर्थन मांगेंगे। जरुरत पड़ी तो इस आन्दोलन को देशव्यापी भी बनाया जायेगा; लेकिन हम हार नहीं मानेंगे, लड़ाई जारी रखेंगे।

सेंट्रल ऑफिस पहुंचने वालों में अमित, उमेश, विनय, सुमित, युगेश, संदीप, मारुति मानव, श्रवण यादव, राणा रोहित, राजेश, श्याम बाबू मौर्य, आकाश, आदर्श, उदय पाल, डॉ० छेदीलाल निराला, शशिकांत, लवकेश, दिलीप कुमार चौरसिया, नितिश, राहुल देव, लकी और भुवाल यादव सहित सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल थे।

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