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STF ने 3 को किया गिरफ्तार UP-SI की भर्ती परीक्षा में किया था धांधली का प्रयास

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वाराणसी । उत्तर प्रदेश उप-निरीक्षक भर्ती परीक्षा (UP-SI भर्ती परीक्षा) में धांधली के आरोप में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की वाराणसी यूनिट ने तीन बदमाशों को चितईपुर जीटी रोड नुआंव अंडर पास से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार धर्मराज यादव निवासी चदेरू चौकठा, थाना जिगना, जिला मिर्जापुर और पुष्पराज सिंह निवासी सेमरा कलबना थाना घूरपुर जिला प्रयागराज पर 15 हजार जबकि प्रभाकर पटेल निवासी मुरादपुर खिदिरपुर ईस्माइलगंज थाना सोरांव पर 10 हजार का इनाम घोषित था। एसटीएफ ने इनके पास से एक इनोवा, स्कार्पियो के आलावा पांच मोबाइल और उप निरीक्षक परीक्षा से संबंधित 12 प्रवेश पत्र बरामद किए है।

बता दें प्रदेश में पिछले वर्ष 17 से 23 नवंबर तक हुई यूपी-एसआई की ऑनलाइन भर्ती परीक्षा में जांच के दौरान चितईपुर पुलिस ने दो और ग्रामीण रोहनियां पुलिस ने एक अभ्यर्थी को बिग और माइक्रोफोन के साथ गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने गिरफ्तार पुष्पराज व धर्मराज को थाना चितईपुर और प्रभाकर को थाना रोहनिया पर दाखिल कराया है।

एसटीएफ को जीएम रेलवे के ग्रुप सी कर्मचारी अमित यादव की तलाश

सॉल्वर गैंग के जरिए नकल कराने की घटना सामने आने पर एसटीएफ वाराणसी के इंस्पेक्टर पुनीत परिहार के नेतृत्व में टीम गठित कर जांच शुरू हुई तो नए गिरोह का पता लगा जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भर्ती करवाने के लिए अवैध धन वसूली कर रहे है। मुखबिर से जानकारी मिलने पर गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वह काफी समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में भर्ती के अवैध धंधे से जुड़े हुये हैं। इनका एक संगठित गिरोह है। इस गैंग में अमित यादव भी शामिल है, जो जीएम रेलवे आफिस प्रयागराज में ग्रुप सी में सिग्नल विभाग में नौकरी करता है। अमित यादव के नैनी स्थित घर में ही गिरफ्तार धर्मराज यादव रहता है। अमित यादव की पत्नी भी राजकीय मुद्रालय प्रयागराज में नौकरी करती है। एसटीएफ द्वारा बरामद इनोवा गाड़ी अमित यादव की पत्नी के ही नाम से है। इसके अलावा ग्राम जोपा, थाना विध्यांचल, मिर्जापुर निवासी अनिल यादव भी इस गैंग का हिस्सा है। यह भी अमित यादव के साथ रेलवे के उसी विभाग में नौकरी करता है।

जीएम से हुई दोस्ती और फिर बना लिया गिरोह

पूछताछ में धर्मराज यादव ने बताया कि अमित से उसका परिचय उसके पिता के माध्यम से हुआ था। वो रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी हैं। वर्ष 2016 में पुष्पराज सिंह के भाई मुल्कराज की रेलवे में ग्रुप डी में नौकरी लगी। मुल्कराज के शैक्षणिक प्रमाण पत्र में अंकित नाम में त्रुटि थी, जिसके कारण वेतन नही मिल रहा था। वेतन के लिए पुष्पराज रेलवे जीएम आफिस गया था, जहॉं उसकी मुलाकात अनिल यादव से हुई। अनिल यादव ने पुष्पराज का सहयोग किया था, जिसके कारण दोनों में घनिष्ठता हो गयी। पुष्पराज व प्रभाकर पटेल मुरादपुर खिदिरपुर इस्माइलगंज थाना सोरांव प्रयागराज पहले से ही मित्र थे। अनिल यादव की प्रभाकर से मुलाकात पुष्पराज ने करायी। इसके बाद से इन लोगों ने मिलकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के इच्छुक अभ्यर्थियों से सम्पर्क कर मोटी रकम लेकर परीक्षा में उत्तीर्ण कराने का काम करने लगे। पुष्पराज व प्रभाकर इच्छुक अभ्यर्थियों को लाते थे और अनिल यादव एवं अमित यादव द्वारा परीक्षा में उत्तीर्ण कराने की जिम्मेदारी ली जाती थी, जिसके लिये इन लोगों द्वारा मोटी रकम वसूली जाती थी। जिससे यह लोग करोड़ो रूपये कमाये।


15-15 लाख में हुई थी डील
पूछताछ में गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने बताया कि पुलिस में उप निरीक्षक पद के लिये ऑनलाइन होने वाली परीक्षा में अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रूपये में डील हुई थी। धर्मराज यादव ने परीक्षा के धांधली करवाने के लिए विग लेकर इलाहाबाद से रोडवेज आया था। अनिल यादव पुष्पराज की स्कार्पियो गाडी से कैंट स्थित उस होटल गया जहाँ धर्मराज रुका था। यहीं 3 अभ्यर्थियों को धर्मराज यादव ने विग लगाया था। 23 फरवरी को फिर प्रभाकर और पुष्पराज डिवाइस लगी विग लेकर वाराणसी आये। अभ्यर्थी अमन पटेल व वशिष्ठ वर्मा को लक्ष्मी लॉज में जाकर डिवाईस युक्त विग लगाये थे, लेकिन पुलिस की सर्तकता से दोनों अभ्यर्थी भी परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश के दौरान पुलिस द्वारा पकड़ लिए गए। पूछताछ के दौरान बताया कि डिवाईस युक्त विग अनिल यादव एवं अमित यादव द्वारा उपलब्ध कराया जाता था।

अभ्यर्थी द्वारा दो मोबाइल सिम मंगाया जाता था। एक मोबाइल सिम विग डिवाईस में लगाया जाता था तथा दूसरा सिम परीक्षा केन्द्र से दूर मौजूद सॉल्वर के पास मौजूद मोबाइल फोन में लगाया जाता था। डिवाइस युक्त विग के साथ सूक्ष्म माइक्रोफोन अभ्यर्थी के कान के अन्दर लगा दिया जाता था। इसके बाद अनिल यादव व अमित यादव द्वारा सॉल्वर को ऑनलाइन प्रश्न उपलब्ध करा दिया जाता था। साल्वर द्वारा अभ्यर्थियों द्वारा उपलब्ध कराये गये सिमयुक्त मोबाइल फोन को एक साथ अपने पास रख लिया जाता था और परीक्षा प्रारम्भ होने पर ऑनलाइन उपलब्ध प्रश्नों का उत्तर एक साथ बोलता था, जिसे अभ्यर्थी अपने कॉन में लगे माइक्रोफोन की मदद से सुनकर सही उत्तर अंकित कर देते थे। गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि अमित यादव व अनिल यादव डिवाइसयुक्त विग की कीमत लगभग 1 लाख रूपये बताते थे।

रियल इस्टेट में निवेश किए पैसे

गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने बताया कि कमाये गये अवैध धन को रियल स्टेट में इन्वेस्ट किया जाता था। इसके लिये प्रभाकर ने भैरवा इन्फ्रावर्ल्ड प्रा0लि0 नाम की कम्पनी बनायी है और पुष्पराज द्वारा अश्वनी इन्फ्रा एण्ड टेक्चर प्रा0लि0 नाम की कम्पनी बनायी गयी है। रियल स्टेट में अनिल यादव एवं अमित यादव का भी पैसा लगा है।

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