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शिवपाल को छोड़ BJP में शामिल हुए रामदर्शन, कहा सपा में सिर्फ मिला धोखा

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आजमगढ़ । समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य और शिवपाल के सबसे करीबी नेताओं में शुमार रामदर्शन यादव ने उपचुनाव में पार्टी को बड़ा झटका दिया है। शनिवार को रामदर्शन अटकलों पर विराम लगातेे हुए शिवपाल का साथ छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने रानीपुर रजमों में एक सभा के दौरान उन्होंने बीजेपी की सदस्यता दिलाई। इसे प्रसपा ही नहीं बल्कि सपा के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है। कारण कि कम से कम मुबारकपुर विधानसभा में रामदर्शन का बड़ा वोट बैंक है। यहां से वे विधायक भी रह चुके हैं।

बता दें कि मूलरूप से शहर से सटेे गेलवारा गांव निवासी रामदर्शन यादव की गिनती सपा के संस्थापक सदस्यों में होती है। कभी रामदर्शन यादव मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। वे दो बार सपा के जिलाध्यक्ष रहे। उन्हें आज भी सपा का सबसे मजबूत जिलाध्यक्ष माना जाता है। वर्ष 1993 में सपा बसपा गठबंधन में रामदर्शन यादव मुबारकपुर से विधायक चुने गए थे।

पार्टी की गुटबाजी और अखिलेश यादव के पार्टी में प्रभाव बढ़नेे के बाद रामदर्शन यादव को दरकिनार कर दिया गया। वर्ष 2012 में टिकट न मिलने पर रामदर्शन सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़े तो रामदर्शन की वापसी हो गयी। रामदर्शन ने मुलायम की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। उस समय रामदर्शन को एमएलसी बनाने का आश्वासन दिया गया था लेकिन मुलायम सिंह यादव अपने वायदे पर खरे नहीं उतरे और राम दर्शन को धोखा ही मिला।

वर्ष 2016 में सपा परिवार में आपसी विवाद शुरू हुआ और शिवपाल पार्टी से अलग हुए तोे रामदर्शन शिवपाल यादव के साथ चले गए। वे प्रसपा के बैनर तले मुबारपुर से चुनाव लड़े। रामदर्शन चुनाव तो नहीं जीत पाए लेकिन सपा के क्लीन स्वीप के मंसूबे पर पानी फेर दिया। बसपा लगातार दूसरी बार मुबारकपुर सीट जीतने में सफल रही। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रामदर्शन गठबंधन में टिकट के प्रबल दोवदार माने जा रहे थे लेकिन सपा ने प्रसपा को यूपी में एक एक सीट दी जिसके कारण उनका विधायक बनने का सपना फिर टूट गया।

बहरहाल काफी मान मनौव्वल के बाद रामदर्शन की नाराजगी दूर हुुए वे सपा के साथ खड़े हुए और सपा प्रत्याशी अखिलेश यादव विधानसभा पहुंच गए। सपा ने सभी 10 सीटों पर जीत हासिल की। चुनाव के बाद से ही रामदर्शन हासिए पर दिख रहे थे। कारण कि प्रसपा यहां उतनी मजबूत नहीं है कि अपने दम पर कोई करिश्मा कर सके और सपा में उनकी पूछ नहीं थी। तभी से चर्चा थी कि रामदर्शन अपने लिए दूसरा ठौर तलाश सकते है।

उपचुनाव की घोषणा के बाद से ही रामदर्शन के बीजेपी में जाने की चर्चा थी जिसपर उन्होंने शनिवार को विराम लगा दिया और रानीपुर रजमों में एक कार्यक्रम के दौरान बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में भगवाधारी हो गए। पूर्व विधायक राम दर्शन यादव का कहना है कि सपा के संस्थापक सदस्यों में था। पर सपा ने अपमानित करने का काम किया। 2012 में टिकट नहीं दिया और जब 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव यहां से चुनाव लड़ने आए तो एमएलसी बनाने का वायदा किया गया था पर सपा ने अपना वायदा पूरा नहीं किया। 2017 के विधानसभा चुनाव से पूर्व राम दर्शन यादव शिवपाल सिंह यादव के साथ आ गए थे। इस बार मुबारकपुर सीट से चुनाव लड़ने की दावेदारी भी कर रहे थे।

पर चाचा शिवपाल सिंह यादव को खुद भतीजे अखिलेश यादव ने समेट दिया। इससे आहत होकर रामदर्शन यादव ने सपा से बाहर जाना ही बेहतर समझा। राम दर्शन यादव के भाजपा में आने से भाजपा को मजबूती मिलेगी। मुबारकपुर विधानसभा में राम दर्शन यादव की मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है।

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