Home राज्य उत्तर प्रदेश शौच में खून आने को हल्के में न ले मरीज BHU डॉ0...

शौच में खून आने को हल्के में न ले मरीज BHU डॉ0 देवेश प्रकाश

131
0

वाराणसी : 19 मई को दुनिया भर में विश्व आईबीडी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है प्ठक् पर जागरूकता बढ़ाना। प्ठक् एक उभरती बीमारी है और उसका प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। पुरुष और महिलाओं पर इसका एक समान प्रभाव होता है।  IBD  15 से 35 वर्ष तक के उम्र के किशोरों और युवाओं व्यस्कों में ज्यादा पाया जाता है।

डॉ0 देवेश प्रकाश यादव (एसोसिएट प्रोफेसर, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग) ने बताया है प्ठक् इनफ्लेमेटरी बावेल डिजीज (उत्तेजक ऑत रोग) को कहते है जो आँतो में उत्तेजना पैदा करने वाले विकारों का समूह है। 

IBD   का कारण सामान्यतः अज्ञात होता है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह पीड़ित व्यक्ति की रोग-प्रतिकार प्रणाली (शरीर की सुरक्षा प्रणाली) की आसामान्य गतिविधि के कारण होता है।

अन्य कारणों में अनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कारण शामिल है। तनाव और कुछ खाने की चीजें भी प्ठक् के लक्षणों को बढ़ा सकती है।
IBD  में दो बिकार शामिल है, जो क्रमशः इस प्रकार है, इसमें पहला है, क्रॉन्स डिजीज (CD) जबकि दूसरा है, अल्सरेटिव कोलाइटिस (UC)
डॉ0 यादव के अनुसार, अगर कोई मरीज दस्त, तुरंत शौच जाने की जरूरत, पेट में ऐठन, शौच में रक्त, वजन, घटना, भूख की कमी और बुखार जैसे लक्षणों से पीड़ित है, तो उसे इन लक्षणों के लिए गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। अगर कोई मरीज  IBD  से पीड़ित पाया जाता है, तो उसे घबराना नहीं चाहिए क्योंकि  IBD  को नियंत्रित रखकर सामान्य/लगभग सामान जीवन जीना संभव है।


हम सभी जानते है कि कोविड-19 उत्पन्न करने वाला कोरोना वाइरस अभी भी फैल रहा है और भारत समेत दुनिया भर में कइ लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। इसमें  IBD   मरीजों में संक्रमित होने के जोखिम और उनके इलाज के प्रबंध को लेकर चिंता बढ़ी है।


डा0 यादव के अनुसार,  IBD  से पीड़ित होने  पर कोविड-19 का खतरा बढ़ने का कोई प्रमाण नहीं है। इसलिए मरीजों को  IBD  का मौजूदा उपचार जारी रखने और लक्षणों को दूर रखने की सलाह दी जाती है। बीमारी अनियंत्रित होने पर मरीज खुराक/उपचार में किसी भी तरह से बदलाव के लिए अपने डॉक्टर की राय ले सकते हैं। साथ ही मरीजों को कोरोना वाइरस के प्रसार की रोकथाम के लिए सामान्य जनता को दिये गये निर्देश का भी पालन करना चाहिए।

अगर किसी  IBD   मरीज को कोविड-19 के लक्षण महसूस होते हैं, तो वह  IBD   का उपचार कुछ हफ्ते लिए बंद कर सकता है। लेकिन मरीजों को पहले डॉक्टर से बात किये बिना  IBD   की दवाओं की खुराक रोकनी या बदलनी नहीं चाहिए।

चिकित्सा विज्ञान संस्थान, गेस्ट्रोएन्ट्रोलॉजी विभाग के असोसिएट प्रोफेसर डॉ0 देवेश प्रकाश यादव के मार्गदर्शन में जनवरी 2021 से सर सुन्दरलाल की ओपीडी कक्ष 305 में प्रत्येक वृहस्पतिवार को आईबीडी क्लिनिक का संचालन किया जा रहा है।

डॉ0 यादव बताते है कि प्रत्येक वृहस्पतिवार को आईबीडी ओपीडी क्लिनिक में 30-40 मरीज आईबीडी से ग्रसित आते है। जबकि मंगलवार को संचालित जनरल ओपीडी में लगभग 10 मरीज आईबीडी में आते हैं। उन्होंने बताया कि आईबीडी से मृत्यु दर 5 प्रतिशत से भी कम है लेकिन इसमें बरती गई लापरवारी से जान पर बन सकती है।  

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here