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वाराणसी : BHU में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर खुली परिचर्चा का हुआ आयोजन

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वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के महामना सभागार में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) पर खुली परिचर्चा का आयोजन हुआ। इस ऑनलाइन एवं ऑफलाइन यानी हाइब्रिड मॉडल में आयोजित इस परिचर्चा में देशभर से शिक्षाविदों, शैक्षणिक प्रशासकों, शिक्षकों, विभागाध्यक्षों, राज्य शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों, प्रधानाचार्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित अन्य हितधारकों ने शिरकत की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (एनसीटीई) द्वारा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस परिचर्चा का उद्देश्य था देशभर के शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय पेशेवर मानक (एनपीएसटी) एवं राष्ट्रीय परामर्श मिशन (एनएमएम) पर व्यापक चर्चा कर इन योजनाओं के अमल हेतु ख़ाका तैयार करना।

कार्यक्रम के दो तकनीकी सत्रों में क्रमशः राष्ट्रीय शिक्षक पेशेवर मानक (एनपीएसटी) एवं राष्ट्रीय परामर्श मिशन (एनएमएम) पर परिचर्चा हुई। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. एच. सी. एस. राठौर, पूर्व कुलपति दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय, गया एवं द्वितीय सत्र की अध्यक्षता प्रो. मधुलिका अग्रवाल, संकाय प्रमुख, विज्ञान संकाय ने किया। कोविड के बढ़ते प्रकोप के चलते कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (एनसीटीई) के अध्यक्ष संतोष कुमार सारंगी एवं सदस्य सचिव केसांग वाई शेरपा ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। अपने संबोधन के दौरान सारंगी ने कहा कि शिक्षकों का नियुक्ति पूर्व एवं नौकरी के दौरान दोनों समय ही प्रशिक्षण बेहद जरुरी है।

उन्होंने बताया कि एनपीएसटी के माध्यम से शिक्षकों को चार श्रेणियों में बाँट रहें – प्रगामी शिक्षक, प्रवीण शिक्षक, कुशल शिक्षक एवं प्रमुख शिक्षक। शिक्षकों के मूल्याङ्कन के एक मॉड्यूल का निर्माण किया जा रहा है जिससे उन्हें आसानी से वर्गीकृत किया जा सके। जिससे वे अपने कैरियर में विकास कर सकें। इसके अलावा राष्ट्रीय परामर्श मिशन (एनएमएम) के माध्यम से ऐसे अवकाशप्राप्त शिक्षक जो अपनी सेवानिवृति के बाद भी सक्रिय हैं उनके अनुभवों का लाभ उठाते हुए शिक्षण संस्थानों एवं व्यवस्थाओं को लाभ पहुँचाना है।

कार्यक्रम के दौरान सेंट्रल हिन्दू स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. एन. के. शाही ने अपने संबोधन में कहा कि  – मानवीय एवं नैतिक मूल्यों का संचयन एक सतत प्रक्रिया और यह प्रशासन के बदलने के साथ मूल्यों के बदलने से बाधित होती है। जब हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में इस कथन को देखते हैं तो यह बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। दरअसल इस तरह के बदलाव को बानने से लेकर लागू करा पाना एक बेहद लंबी और जटिल प्रक्रिया है और इसके परिणामों को जान पाना उससे भी लम्बे कालखंड की मांग करता है। अत: हमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति के हर पहलू पर बेहद गंभीरता के साथ अध्ययन कर उसे अपनाने की दिशा में प्रयास करना होगा। तभी हमारी आने वाली पीढ़ियों में वह बदलाव दृष्टिगोचर हो सकेंगे जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों में निहित है। एक प्रतिभागी प्रो. अनिल सिंह ने कहा कि शिक्षण में वही लोग आये जिनका वाकई में शिक्षण के क्षेत्र में रुझान हो। अन्यथा एक्सीडेंटल तौर पर शिक्षक बने लोग अपने जिम्मेदारी को तल्लीनता के साथ निभा ही नहीं सकते।

इसके पूर्व दोनों तकनीकी सत्रों के शुरुआत में अपने प्रेजेंटेशन के माध्यम से सभी को एन.पी.एस.टी. एवं एन.एम.एम. के बारे में सारगर्भित जानकारी देकर एन.सी.टी.ई. के रिषभ खन्ना, रिया एवं नीरज ने विशेष तौर पर लाभान्वित किया।

प्रो. एच. सी. एस. राठौर ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि इस पूरे प्रयास का उद्देश्य शिक्षा को और अर्थपूर्ण बनाना है। उन्होंने कहा कि एनपीएसटी के मसौदे को बड़ी मेहनत से बनाया गया है किन्तु इसके बावजूद मैं इसके मौजूदा प्रारूप से सहमत नहीं हूँ मुझे लगता है कि शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय पेशेवर नीति के लिहाज से अभी इसमें कई कमियां हैं हालाँकि इसे न्यूनतम पेशेवर योग्यता के तौर पर स्वीकृत किया जा सकता है।

वसंत कन्या महाविद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव ने कहा कि शिक्षक की निष्ठा, शिक्षण की गुणवत्ता तय करती ना कि उसकी सैलरी। कार्यक्रम में प्रतिभाग कर रही आर्य महिला पीजी कॉलेज की डॉ. अन्नपूर्णा दीक्षित ने मूल्याङ्कन पद्धितियों को लेकर प्रश्न पूछे, डॉ. रीता सिंह ने आंतरिक गुणवत्ता को लेकर सुझाव दिये। केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के डॉ. महेश शर्मा ने भी एनपीएसटी के क्रियान्वन को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए उन्होंने कोरोना महामारी के बाद शिक्षकों की भूमिका एवं कक्षा के परिवेश में आये बदलाव पर ध्यान आकृष्ट किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम में शारीरिक शिक्षा विभाग के डॉ. अखिल मेहरोत्रा एवं अभिनव सिंह की पुस्तक ‘एमसीक्यू फॉर फील्ड हॉकी’ पुस्तक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की संयोजक प्रो. सुषमा ने  कहा कि सभागार में उपस्थित प्रतिभागियों सहित मंचासीन सहयोगियों के कई मौलिक सुझावों, जरुरी समस्याओं, चिन्ताओं को सुनने एवं इस सभागार से ही उन्हें सुलझाने हेतु कई उपायों के निकलने के बाद मुझे लगता है आज का हमारा आयोजन अपने उद्देश्यों में काफी हद तक सफल सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि आज के आयोजन से निकले इन सुझावों, जरुरी चिंताओं को रिपोर्ट की शक्ल देकर हम इस आयोजन की बात एनसीटीई एवं अन्य नीति नियंताओं तक पहुँचाने की अपनी जिम्मेदारी को निभाएंगे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप चहर ने किया। इस अवसर पर प्रो. अभिमन्यु सिंह, प्रो. राजीव व्यास, डॉ. धीरेन्द्र कुमार राय, डॉ. अभिषेक वर्मा, डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. उपेन्द्र कुमार, डॉ. नेहा पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।

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