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वाराणसी में गंगा में अवैध बालू खनन की जांच को NGT ने गठित की जांच कमेटी

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वाराणसी : अस्सी से राजघाट तक गंगा उसपार अवैध बालू खनन के मामले को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) नें सोमवार को विस्तृत अंतरिम आदेश जारी किया है। प्रधान पीठ, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली की कोर्ट नंबर-II में न्यायमूर्ति ब्रिजेश सेठ्ठी की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीठ ने वाराणसी में अस्सी से राजघाट तक गंगा उसपार अवैध खनन मामले की जांच के लिए नमामि गंगे, राज्य प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड , राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण तथा जिलाधिकारी वाराणसी सहित चार सदस्यीय संयुक्त जांच दल का गठन किया है।

एनजीटी नें संयुक्त जांच-दल को चार सप्ताह में गंगा बालू खनन स्थल पर पहुंच कर जांच करने को कहा है। यही नहीं संयुक्त जांच-दल को तीन महीने में कार्रवाई प्रतिवेदन (एक्शन टेकेन रिपोर्ट) सौंपनें का आदेश दिया है।

बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश दीक्षित नें एनजीटी के समक्ष स्थानीय निवासी सह इलाहाबाद उच्च न्यायालय अधिवक्ता, सौरभ तिवारी के माध्यम से वाराणसी में गंगा नदी में अवैध बालू खनन को लेकर याचिका दायर किया था, जिस पर गत 17 फरवरी को न्यायमूर्ति ब्रिजेश सेठ्ठी तथा अन्य सदस्य पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ अफरोज अहमद की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ब्रिजेश सेठ्ठी नें कड़ा रुख अख्तियार किया था। याचिकाकर्ता की ओर से एनजीटी के समक्ष दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से गंगा में अवैध बालू खनन, सर्वोच्च न्यायालय केआदेश, “दीपक कुमार बनाम हरियाणा सरकार व अन्य” तथा एनजीटी के स्तर से जारी गाईडलाईन के विरुद्ध किया जा रहा है।

याचिका में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है की बगैर जिला सर्वे रिपोर्ट तथा पर्यावरण प्रभाव आकलन के ही खनन का आदेश दिया गया है तथा याचिकाकर्ता ने अपनीं याचिका में इस बात का उल्लेख भी किया है कि बगैर सीसीटीवी कैमरा, बगैर नियमित पुलिस पेट्रोलिंग तथा बगैर सीमांकन के धडल्ले से बालू खनन हो रहा है। इतना ही नहीं खनन विभाग के पास खनन का न ही आंकलन है, न आजतक नियमित रुप से खनन रिपोर्ट जिलाधिकारी, वाराणसी के पास भेजी गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ तिवारी के मुताबिक जिलाधिकारी वाराणसी ने गंगा नदी में बनाई गई नहर से निकले ड्रेज्ड मैटिरियल (बालू) के उठान के लिए टेंडर निकाला था। गंगा नदी में पिछले वर्ष आई बाढ़ में नहर और बालू समतल हो गए फिर खनन किस बात का? एनजीटी नें मामले में अगली सुनवाई 27 मई को तय की है। याचिकाकर्ता डॉ अवधेश दीक्षित एवं अधिवता सौरभ तिवारी ने एनजीटी के आदेश का स्वागत किया है।

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