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प्रो श्री प्रकाश शुक्ल की नई कविता पुस्तक ‘वाया नई सदी’ का हुआ लोकार्पण

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वाराणसी : ‘पुलिया प्रसंग समारोह’ के अंतर्गत बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आई आई टी,बीएचयू के मुक्ताकाशी मंच पर हिंदी के महत्वपूर्ण कवि और बीएचयू के हिंदी विभाग में आचार्य प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल की सद्यः प्रकाशित कविता पुस्तक ‘वाया नई सदी’ को जन संवाद कार्यक्रम के बीच अनौपचारिक रूप से लोकार्पण किया गया।

इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता बीएचयू के प्रसिद्ध न्यूरो चिकित्सक प्रो विजयनाथ मिश्र ने की।पुस्तक को लोकार्पित करने वालों में चायवाले मजनू,फल विक्रेता राजकुमार उपाध्याय और अखबार विक्रेता छन्नू लाल भी शामिल थे।

इस अवसर पर आत्म वक्तव्य देते हुए पुस्तक के लेखक प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा की आज बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध की साधना और उनकी करुणा व आलोचनात्मक तेवर से उन्हें बहुत प्रेरणा मिलती है।पुलिया प्रसंग को ज्ञान के संस्कार व भाव के परिष्कार के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए उन्होंने कहा कि संग्रह में संकलित अनेक कविताएँ चलते -फिरते,बोलते बतियाते ही लिखी गई हैं जिस कारण से इनमें एक गति है।इस पुस्तक को उन्होंने अतीत की याद और भविष्य की बुनियाद के रूप में रेखांकित किया।

कहा कि बनारस मेरी कविताओं में गहरे धड़कता है और यहां संकलित कई कविताएं सामाजिक चरित्रों की चीड़फाड़ भी करती हैं।

अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो विजयनाथ मिश्र ने कहा कि प्रो श्रीप्रकाश शुक्ल की कविताएं समाज मन में गहरे विन्यस्त कविताएं हैं।वे दृश्यों को जिस तरह से भाव बद्ध करते हुए भाषा में रचते हैं उससे उनकी अभूतपूर्व काव्य शक्ति का पता चलता है।कोरोना काल में लिखी उनकी बहुत सी कविताएं जीवन में चिकित्सकीय महत्व रखती हैं।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रो शुक्ल की ये कविताएं सिर दर्द जैसी लाइलाज बीमारियों को दूर करने में कारगर साबित हो सकती हैं।एक न्यूरो चिकित्सक के रूप में उन्होंने भविष्य में इन कविताओं के महत्व पर शोध करवाने की बात भी की।

युवा आलोचक डॉ विंध्याचल यादव ने कहा कि प्रो शुक्ल की यह पुस्तक अब तक कि उनकी श्रेष्ठ कविता पुस्तक है जिसमें उन्होंने सांस्कृतिक महत्व की कविताओं के साथ राजनैतिक व सामाजिक महत्व की अनेक कविताएं लिखी हैं।उनका यह काव्यबोध नई सदी की तमाम विषमताओं के साथ संभावनाओं को भी समझने में सक्षम है।

युवा कवि डॉ अमरजीत राम ने कहा कि प्रो शुक्ल की पुस्तक ‘वाया नई सदी’ बुद्ध व कबीर की परंपरा में लिखी गई है जो अपने समय की गहरी आलोचना करती है।इसमें संकलित अनेक कविताएं हाशिये के समाज से जुड़ी कविताएं हैं।इन कविताओं में समाज की विद्रूपताओं के साथ व्यक्तिमन की अनेक जटिलताओं को स्वर देने की कोशिश है।

शोधार्थी दिवाकर तिवारी ने कहा कि ‘वाया नई सदी’ का महत्व इस कारण से ज्यादा है कि ये जीवन के प्रति गहरी उम्मीद से जुड़ी कविताएं हैं।इनमे एक पर्यावरण बोध है जिंसमें कोयल,कचकचिया ,फुलसूंघी से लेकर बबूल व पपीता तक भी शामिल हैं।

इस कार्यक्रम में उदय पाल ने ‘कोइलिया जल्दी कूको न’,आर्यपुत्र दीपक ने ‘यादें’,अक्षत पांडेय ने ‘गूलर’,जूही त्रिपाठी ने ‘तुम न बदले’,आस्था वर्मा ने ‘ढेला’,डॉ राकेश पांडेय ने ‘देवदारु’,डॉ भीम कन्नौजिया ने ‘नवता’, उमेश गोस्वामी ने ‘तोप’,गोपी चौरसिया ने ‘तो क्या करूँ’,निखिल कुमार ने’ नियम’ और बीए की छात्रा उत्सुकता ने ‘रोटी’ कविता का शानदार पाठ भी किया।शोध छात्र सुधीर ने बांसुरी पर कुछ कविताओं की प्रस्तुति दी।

शोधार्थी उदय पाल ने ‘पुलिया गान’ नाम से चर्चित कवि सुभाष राय द्वारा लिखित कविता का पाठ भी किया।इसे पुलिया प्रसंग के शीर्षक गीत के रूप में आज मान्यता दी गई।

कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र उदय पाल ने किया।धन्यवाद ज्ञापन शोध छात्र अक्षत पांडेय ने किया।

इस अवसर पर अनेक शिक्षक , शोधार्थी व बीएचयू के कर्मचारी उपस्थित रहे।

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