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कृत्रिम फेफड़े के समीप “मॉम्स फॉर क्लीन एयर” ने की वायु प्रदूषण पर सभा आयोजित की

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वाराणसी । को 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान के अंतर्गत क्लाइमेट एजेंडा द्वारा अस्सी घाट स्थित कृत्रिम फेफड़े के समीप “मॉम्स फॉर क्लीन एयर” ने सभा आयोजित की। बता दे कि 10 अप्रैल को स्थापित कृत्रिम फेफड़ा मात्र दो दिन में काला पड़ गया है, इससे स्पष्ट होता है कि शहर की आबोहवा काशीवासियों के लिए सुरक्षित नहीं है। इस सभा का उद्देश्य बनारस में लगातार बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और विशेष रूप से बच्चों पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर से माताओं को सचेत करते हुए साफ़ हवा के लिए व्यवहार परिवर्तन एवं प्रशासन की भूमिका पर चर्चा करना था।

इस दौरान सभा का नेतृत्व करते हुए क्लाइमेट एजेंडा की निदेशक एकता शेखर ने बताया कि बढ़ते वायु प्रदूषण का सीधा और सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर 2020 की रिपोर्ट के अनुसार, आउटडोर और इनडोर वायु प्रदूषण के कारण 2019 में जन्म के एक महीने के भीतर भारत में 116,000 से अधिक शिशुओं की मृत्यु हो गई। वहीँ इसी अध्ययन संस्थान की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर 3 मिनट पर एक बच्चे की मौत हो जाती है। इनमे सबसे टॉप पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार टॉप 3 प्रदेश हैं जहाँ सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गयी है। इसके अलावा, प्रतिवर्ष अस्थमा, ब्रोंकाइटिस आदि जैसे बीमारियों के कारण लाखों बच्चों का विकास प्रभावित हो रहा है। ऐसी गंभीर स्थिति में शासन प्रशासन का सुस्त रवैया डरावना है।

सभा में मॉम्स फॉर क्लीन एयर की सदस्य सरोज सिंह ने बताया कि “बनारस में 2 दिन के अन्दर कृत्रिम फेफड़े का काला हो जाना हमे सचेत करता है वायु प्रदूषण कितनी घटक समस्या है. ऐसे में, यह जरूरी है कि बच्चों की सेहत की रक्षा के लिए माताएं बाहर निकले. सौर ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन, कचरा प्रबंधन की व्यवस्था ठीक की जाए और सबसे ज़रूरी है कि बनारस की बदहाल सड़को की ठोस मरम्मत की जाए.”

इस सभा में मुख्य रूप से सुजाता उकील, श्वेता यादव, अंशिका वर्मा, रतिकेश पूर्नोदय, आदि समेत वसंत कन्या महाविद्यालय की छात्राएं एवं अन्य महिला एवं पुरुष उपस्थित थे।

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