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काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी परिसर विवाद पर कोर्ट का आदेश,खोलकर या तोड़कर करें सर्वे

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वाराणसी। काशी विश्वनाथ ज्ञानवापी परिसर विवाद पर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने गुरुवार को बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। उन्होंने कहा है कि परिसर का सर्वे जारी रहेगा। रोज आठ से 12 बजे तक होगा सर्वे। सर्वे के लिए कोर्ट ने 2 और अधिवक्ताओं को कमिश्नर नियुक्त किया। विशाल सिंह और अजय सिंह। उनके साथ अजय मिश्रा भी होंगे। जरूरत पड़ने पर मस्जिद का ताला भी तोड़ा जाएगा। सर्वे सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी प्रदेश शासन और प्रशासन की। सर्वे कमिश्नर जो कहेगे वो उसका पालन सुनिश्चित कराना होगा। अदालत में 17 मई को पेश की जाएगी रिपोर्ट।

बता दें कि इससे पूर्व बुधवार को सिविल जज (सीनियर डिवीडन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत में बुधवार को ज्ञानवापी मामले में दो घंटे तक चली बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कोर्ट को 12 मई तक के लिए स्थगित कर दिया था। जस्टिस दिवाकर ने 12 मई को आदेश के लिए तिथि नियत की दी थी।

इस दौरान कोर्ट में ताला तोड़कर ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर जाकर वीडियोग्राफी और सर्वे किये जाने का विरोध अंजुमन इंतजामिया की तरफ से किया गया। इनके अधिवक्ता अभयनाथ यादव ने कहा कि वर्ष 1936 में दीन मोहम्मद बनाम सेक्रेटरी ऑफ स्टेट में यह घोषित किया जा चुका है कि मस्जिद, कोर्टयार्ड और उसके नीचे की भूमि वक्फ बोर्ड की है और इसमें मुसलमान धर्म के अनुसार नमाज प्रार्थना उर्स आदि करने के अधिकारी है जो अनादिकाल से बिना किसी अवरोध के होता चला आ रहा है। ऐसे में ज्ञानवापी तहखाने के अंदर ताला तोड़कर सर्वे किये जाने का आवेदन खारिज होने योग्य है। यह भी कहा इस आवेदन में कही गई बातें वाद पत्र में दिए गए तथ्यों के विपरीत है ऐसे में कानूनन संज्ञान नही लिया सकता।

अदालत से आराजी नंबर- 3190 चौहद्दी,एरिया स्पष्ट होने के बाद ही सर्वे की बात कही गई। अदालत में डीजीसी सिविल के उस आवेदन का भी जिक्र किया गया जिसमें एसीपी सुरक्षा के हवाले से कहा गया कि मस्जिद परिसर में जाने से सुरक्षा का खतरा है और ज्ञानवापी वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति मानी गई है और शृंगार गौरी बैरिकेटिंग के बाहर होने की बात कही गई है ऐसे में ज्ञानवापी के अंदर वक्फ बोर्ड की सम्पत्ति होने के कारण सर्वे कराने व ताला तोड़ने का आदेश नही दिया जा सकता। यह भी कहा गया कि कोर्ट ने बैरिकेटिंग व मस्जिद में प्रवेश कर कमीशन की कार्यवाही वीडियोग्राफी करने के लिए आदेशित नही किया गया है। इस आरोप का खंडन किया कि मस्जिद में पहले से ही लोग छिपे थे हर धर्म मे आस्था रखने वाले अन्य समय भी धार्मिक स्थल परिसर में रहते है।
डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा सरकार व जिला प्रशाशन अदालत के आदेश का अनुपालन कराने को तैयार है और दो घंटे की कमीशन कार्यवाही के बाद सर्वे कमिश्नर बदलने का विरोध किया। वादी पक्ष की तरफ से सुधीर त्रिपाठी,सुभाषनंदन चतुर्वेदी, शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी, मदनमोहन ने अंजुमन इंतजामिया की आपत्ति का जोरदार विरोध किया कहा कि यह कमीशन की कार्यवाही रोकने का प्रयास है। पहले कमीशन की रिपोर्ट कोर्ट में आए फिर उस पर आपत्ति की जा सकती है या दूसरे सर्वे कमीशन की मांग की जा सकती है।

कोर्ट की कार्यवाही के दौरान नियुक्त सर्वे कमिश्नर अजय मिश्र,वादिनीगण, जितेंद्र सिंह विशेन के अलावा सुरक्षाकर्मी डटे रहे। विशेष यह रहा कि अदालत ने सुनवाई के दौरान विधिक पत्रकारों धीरेंद्र नाथ शर्मा,मेराज फारूकी जुग्गन, घनश्याम मिश्र,अमरेंद्र तिवारी,वीरेंद्र सिंह और मनोज तिवारी को कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी थी।

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