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पर्चा खारिज होने पर ‘मृत’ उम्मीदवार संतोष मूरत सिंह , बोला ‘मैं जिंदा हूं’ हाईकोर्ट जाकर करेंगे चुनाव आयोग की शिकायत

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में सातवें चरण में विधानसभा का चुनाव होना है। चुनाव से पहले नामंकन प्रक्रिया में अलग-अलग रंग देखने को मिल रहा है। वाराणसी में नामांकन खारिज होने पर जिला मुख्यालय पर एक हाई वोल्टेज ड्रामा उस समय देखने को मिला जब अपने जिंदा होने के प्रमाण के लिए साल 2012 से चुनाव लड़ने वाले संतोष मूरत सिंह का पर्चा खारिज हो गया। संतोष अपने जिंदा होने का प्रमाण देते रहे लेकिन बात नहीं बनी। जिला मुख्यालय के गेट से निकलते हुए उसने वहीं एडीएम सिटी गुलाबचंद के पैर पकड़ लिए और न्याय की गुहार लगाने लगा। उसने अपने जीवित होने के प्रमाण के लिए संतोष मूरत पुलिस की जीप के आगे बैठ गया और फूट-फूटकर रोने लगा।

हाईकोर्ट जाकर करेंगे चुनाव आयोग की शिकायत
पुलिस के जवानों ने काफी मशक्कत के बाद उसे हटाया। पुलिस ने उस पर शांत भंग करने की आशंका के आरोप में हिरासत में ले लिया। इस दौरान संतोष ने चुनाव प्रचार पर काफी गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि साजिश के तहत उसका पर्चा खारिज किया गया है। कहीं न कहीं सत्ता में बैठे लोगों को डर था कि संतोष अपनी लोकप्रियता के कारण जीत न जाए। उन्होंने नामांकन रद्द होने के पीछे वजह शपथ पत्र की त्रुटि बताई। लेकिन संतोष ने इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हुए हाईकोर्ट जाकर चुनाव आयोग की शिकायत करने की बात कही है।

कौन हैं संतोष मूरत सिंह
वाराणसी के संतोष मूरत सिंह चौबेपुर के छितौनी गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने नामांकन के दौरान बताया था कि 20 वर्षों से निर्दलीय ही चुनाव लड़ते आए हैं। लेकिन जनसंघ पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट भी दिया है। उनके पास प्रूफ के लिए वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड भी है। लेकिन इसके बाद भी राजस्व विभाग की फाइल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।

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