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वाराणसी : गणतंत्र दिवस पर DDU के ब्लड बैंक में आयोजित हुआ रक्तदान शिविर, सीएमओ बोले- रक्तदान से जला सकते है कई घरों के बुझते चिराग

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वाराणसी। राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में काशी रक्तदान नेत्रदान कुटुंब एवं अखिल मध्येशीय वैश्य सभा के संयुक्त तत्वावधान में रक्तदान शिविर-अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने कहा कि रक्त एक ऐसी अवयव है जिसे बनाया नहीं जा सकता। इसकी आपूर्ति का कोई और विकल्प भी नहीं है। यह व्यक्ति के शरीर में स्वयं ही बनता है। कई बार मरीजों के शरीर में खून की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि उन्हें किसी और व्यक्ति से ब्लड लेने की आवश्यकता पड़ जाती है। ऐसी ही आपातकालीन स्थिति में खून की आपूर्ति के लिए लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करके कई जरूरतमंदों की जिंदगी बचाई जा सकती है। इस मौके पर पैथोलॉजिस्ट डॉ० एल पी गुप्ता ने कहा कि रक्तदान एक महादान कार्य है। रक्तदान के कई फायदे हैं। रक्तदान करने से शरीर में नया रक्त बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। हृदय रोग की संभावनाएं कम हो जाती हैं। रक्तदान से किसी का जीवन बचाने का आत्म संतोष होता है तथा यदि कभी स्वयं अथवा किसी पारिवारिक सदस्य को रक्त की आवश्यकता पड़ती है तो प्राथमिकता के आधार पर रक्त दिया जाता है।

इस दौरान अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एके मौर्य ने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता है। खून की चंद बूंदों से किसी के घर का चिराग बुझने से बच सकता है। परोपकार करना वीरों का गहना है। 18 से 65 वर्ष का स्वस्थ व्यक्ति जिसका वजन 45 किलोग्राम या अधिक हो, वह रक्तदान कर सकता है। स्वस्थ व्यक्ति समान्यतया पुरुष प्रत्येक तीन माह के अंतराल पर एवं महिला प्रत्येक चार माह के अंतराल पर रक्तदान कर सकते हैं।

इस शिविर में 40 व्यक्तियों द्वारा रक्तदान किया गया जिनमें प्रमुख रूप से प्रदीप इसरानी ने 145वीं बार, राजेश गुप्ता ने 50वीं बार, नमित पारिख ने 42वीं बार, आशीष गुप्ता ने 40वीं बार, शशिकला श्रीवास्तव ने 24वीं बार रक्तदान किया। शिविर का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा केक काटकर किया गया। इस मौके पर काशी रक्तदान नेत्रदान कुटुंब एवं अखिल मध्येशीय वैश्य सभा की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अंग वस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

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