Home राज्य उत्तर प्रदेश BHU में चल रहे बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स बंद होने के कगार...

BHU में चल रहे बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स बंद होने के कगार पर, छात्रों का भविष्य अंधेरे में

0
देखे वीडियो

वाराणसी। बिना दवा के ही हर दर्द में राहत देने वाली फीजियोथेरेपी की जरूरत आज के समय मे मेडिकल साइंस में सबसे ज्यादा हो रही है। वही बदलती जीवन के दिनचर्या की वजह से लोगों शरीर के जोड़ों और मसल्स में दर्द की समस्याएं भी बढ़ती जा रही, वहीं हर अस्पताल में इसके एक्सपर्ट्स की मांग और तादाद भी बढ़ रही है। जिलें के कई स्थानों पर हजारों फीजियोथेरेपी की शाखाएं भी खुल रहे हैं। ऐसे में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में चल रहा बैचलर ऑफ फीजियोथेरैपी (BOT) कोर्स बंद होने की कगार पर आ गया है। जिससे छात्रों का भविष्य अधर में होने की कगार पर है।

इस बारे में जब छात्रों ने बात की गई तो छात्रों ने बताया कि कि डायरेक्टर इसे बंद करने पर अमादा हैं। अस्पताल में फर्श पर फर्श चढ़ाए जा रहे। मगर, फिजियोथेरेपी के लिए फंड नहीं है। जबकि, हमने सालाना 63 हजार रुपए फीस दी है। कुल 150 छात्रों ने यह रकम भरी है। यह चुकाने के बावजूद स्टोर रूम में बोरे पर बैठ कर पढ़ना पड़ रहा है। इस वर्ष पास आउट होते ही हम सड़क पर आ जाएंगे। हड्डियों, मसल्स और नसों से जुड़ी प्रॉब्लम्स वे मिनटों में ही सॉल्व कर लेते हैं। मगर, विश्वविद्यालय प्रशासन इस कोर्स का उपयोगिता ही नहीं समझ पा रहा।

IMS BHU

बीते दो साल में नही हुआ कोई एडमिशन

वही छात्रों का कहना है कि इस कोर्स में बीते दो साल से कोई एडमिशन नहीं हुए हैं। वहीं, अभी तक इसमें तीन बैच के एडमिशन हो चुके हैं। मोटी फीस ली गई। अब उनकी कक्षाएं पूरी होने के बाद यह कोर्स बंद कर दिया जाएगा। कोई नया एडमिशन नहीं होगा। कहां तो, एडमिशन के दौरान प्लेसमेंट की बात हुई थी। BHU जैसे बड़े अस्पताल का सब्जबाग दिखाया गया था कि आप यहां पर रोजाना हजारों मरीजों पर काम कर सकेंगे। मगर अब कोर्स के साथ इन छात्रों का भविष्य भी अंधकार में डूबता जा रहा है।

यदि यह कोर्स आगे नही चलता तो डिग्री हो जाएगी अमान्य…

वही इस बारे में छात्रों का कहना है कि यदि यह कोर्स आगे नहीं चलाया जाता है तो उनकी डिग्री ही अमान्य हो जाएगी। यह डिग्री कहीं भी मास्टर कोर्स या नौकरी में अप्लाई करने के लिए वैलिड नहीं मानी जाएगी। इस तरह से साढ़े 4 साल के इस कोर्स का मतलब कुछ भी नहीं रह जाएगा। दरअसल, आपको रिकग्निशन के लिए दिखाना पड़ता है कि कोर्स का संचालन हो रहा है और नए बैच के एडमिशन जारी हैं ।

छात्रों ने बताया कि BOT कोर्स को NCAHP /स्टेट मेडिकल फैकल्टी द्वारा अभी तक मान्यता ही नहीं मिली है। इसको लेकर BHU ने भी कोई कार्यवाही नहीं की। एडमिशन के वक्त हर साल के हिसाब से 60 हजार रुपए दिए गए। कुल 150 छात्रों ने अब तक एडमिशन ले लिया है। मगर आज तक पढ़ने के लिए न तो कायदे की सीट है, नही क्लासरूम इंस्टीट्यूट के एक स्टोर रूम कक्षाएं चलाईं जाती हैं और वहीं पर नाम मात्र का प्रैक्टिकल भी होता है। एक कमरे में 6 बैच की कक्षाएं होती हैं, जो कि ढंग से नहीं चल पाता। इसके अलावा न लैब है, न प्रॉपर फैकल्टी और न ही इक्वीपमेंट्स हैं। क्लीनिकल स्ट्रक्चर भी नहीं है। वही सप्ताह में 3-4 दिन क्लास चलता है। मगर, एक भी परमानेंट फैकल्टी या अनुभवी टीचर क्लास नहीं लेते। एडमिशन के वक्त कहा गया था कि यहां आपको प्लेसमेंट मिलेगा। अच्छे अस्पतालों में प्रैक्टिस करने का मौका होगा। यहां पर तो क्लासरूम ही कहीं नहीं बना। लाइब्रेरी छोड़िए, यहां पर तो फिजियोथेरेपी की एक किताब तक नहीं मिलती।

शिकायत पत्र दिखाते हुए छात्र

वही वर्ष 2021 में भारत सरकार द्वारा NCAHP एक्ट का गठन करके गजट प्रकाशित कराया गया। तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर राकेश भटनगार ने 20 सीटों के साथ बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स के शुरुआत पर मुहर लगा दी। एंट्रेंस और एडमिशन के प्रावधान किए गए। काउंसिलिंग के दौरान चिकित्सा विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) के डायरेक्टर ने इस कोर्स में एडमिशन लेने वालों से कहा यहां पर बेहतर प्लेसमेंट मिलेगा। इस कोर्स की नितांत जरूरत है देश को।

फिजियोथेरेपी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा की गई है शिकायत

वही इस समस्या को लेकर फिजियोथेरेपी वेलफेयर एसोसिएशन ने वर्तमान डायरेक्टर प्रो. एसके सिंह को शिकायत पत्र भेजा है। कहा कि फिजियोथेरेपी कर रहे छात्रों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। उनसे 60 हजार रुपए फीस ली गई, मगर रशीद में केवल 14-15 हजार रुपए के खर्चों का जिक्र है।

विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने बताया कि यह कोर्स पूरी तरह से रिकॉग्नाइज्ड है। UGC ने मान्यता दी है। यह कोर्स भारत में 75 साल से चल रहा है। मगर, काउंसिल से अभी तक मान्यता नहीं मिली है। बच्चे भी काउंसिल को लेकर कंफ्यूज हो रहे हैं। काउंसिल इंस्टीट्यूट को अपना अम्लिएशन देती है।

डेढ़ साल पहले यह काउंसिल बनी है। मगर, अभी तक एक्टिव नहीं हो पाई है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों जगह काउंसिल का गठन अब तक नहीं हो पाया है। जब यह काम करना शुरू करेगी तो आसानी से इस कोर्स के लिए इंस्टीट्यूट का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। काउंसिल के सदस्य यूनिवर्सिटी का विजिट करेंगे। कुछ टर्म्स एंड कंडीशन होंगी। इसके बाद कोर्स को चलाने पर कांउसिल मुहर लगाई जाएगी। यदि काउंसिल की मुहर नहीं लगी तो इन्हें मास्टर डिग्री या प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे।

देखे वीडियो

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here